कानून को ठेंगा, जिम्मेदारी को रौंदता सीएमओ? पलारी नगर पंचायत में बिजली चोरी का सनसनीखेज खुलासा

रिपोर्टर:- उत्तम साहू
बालोद | पलारी :- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की नगर पंचायत पलारी में वह सामने आया है, जिसने प्रशासनिक ईमानदारी, सरकारी जवाबदेही और कानून के राज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पंचायत के जिम्मेदार पद पर बैठा मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) कथित रूप से बिजली चोरी कर ब्रेकर मशीन चलवाते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद बिजली विभाग ने मौके पर कार्रवाई करते हुए दो मशीनों को जब्त कर लिया।
यह कोई मामूली गलती नहीं, बल्कि सार्वजनिक पद का दुरुपयोग, सरकारी संसाधनों का अपराध में इस्तेमाल और कानून की खुली अवहेलना का मामला है।
बिजली चोरी
सीधा आपराधिक कृत्य भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत बिजली चोरी एक गंभीर आपराधिक अपराध है, जिसमें भारी जुर्माना
आर्थिक क्षति की वसूली और कारावास तक का प्रावधान है।सवाल यह है कि जब आम नागरिक पर बिजली चोरी का आरोप लगता है तो तुरंत एफआईआर होती है, मीटर उखाड़ा जाता है, लेकिन क्या अधिकारी होने से अपराध वैध हो जाता है?सरकारी पद की आड़ में अवैध संचालन
सूत्रों के अनुसार, ब्रेकर मशीनों का संचालन बिना वैध विद्युत कनेक्शन किया जा रहा था। यह न सिर्फ बिजली विभाग को आर्थिक नुकसान है, बल्कि राजस्व चोरी
शासकीय पद की गरिमा का हनन और जनता के भरोसे के साथ धोखा है।विभागीय अपराध भी उतना ही गंभीर
यह मामला केवल विद्युत अधिनियम तक सीमित नहीं है।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के अनुसार –
कोई भी शासकीय अधिकारी यदि अपने पद का दुरुपयोग करता है या अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो यह गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है।ऐसे में सीएमओ पर विभागीय जांच निलंबन और सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई बनती है।प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या जिला प्रशासन को इसकी जानकारी थी?क्या नगर पंचायत की मशीनें लाभ के लिए चलाई जा रही थीं?और अगर हाँ, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
जनता पूछ रही है जवाब
पलारी की जनता आज यह जानना चाहती है कि
“अगर कानून तोड़ने वाला खुद कानून का रखवाला हो, तो इंसाफ किससे मांगा जाए?”यह मामला उदाहरण बनना चाहिए, ताकि यह संदेश जाए कि कुर्सी अपराध का लाइसेंस नहीं होती।अब निगाहें प्रशासन और शासन पर टिकी हैं —क्या कार्रवाई होगी या फाइलों में सच्चाई दफन कर दी जाएगी?



