हमर छत्तीसगढ़

नहीं टूटा हौसला बालोद जिला चिकित्सालय ने रचा नया इतिहास!

संपादक:- मीनू साहु 

रिपोर्टर:- उत्तम साहु 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ने अपनी ताकत और समर्पण का लोहा मनवाया है। ग्राम खपरी की 56 वर्षीय बुजुर्ग रामकली बाई की जांघ की हड्डी टूटने के बाद परिवार में हताशा छा गई थी, लेकिन जिला चिकित्सालय बालोद के डॉक्टरों ने महज चार दिनों में चमत्कार कर दिखाया। 23 फरवरी को भर्ती होने के बाद 27 फरवरी को ही सफल सर्जरी से रामकली बाई को नई जिंदगी और दर्द से मुक्ति मिली। यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि समय पर मिली बेहतरीन चिकित्सा का जीता-जागता प्रमाण है!मुख्य चिकित्सा अधीक्षक आर.के. श्रीमाली के कुशल मार्गदर्शन में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज सोरी ने पूरी टीम के साथ मिलकर जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. एन.के. साहू और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अविनाश मंडावी ने अपनी विशेषज्ञता से हर जोखिम को पार किया। ऑपरेशन थिएटर में एस. देवदास, एसनेताम, शिरिन, पूर्णिमा, पिंकी, चैतराम, भगवती, कोमल जैसे समर्पित स्टाफ सदस्यों ने दिन-रात एक कर दिया। उनकी मेहनत ने साबित कर दिया कि सरकारी अस्पताल भी निजी से कम नहीं, बल्कि कई बार उनसे आगे भी साबित हो सकते हैं।यह सफलता केवल रामकली बाई की नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण छत्तीसगढ़ के लिए संदेश है—देर मत करो, अस्पताल पहुंचो! छोटे-छोटे जिले के अस्पताल अब उन्नत उपकरणों, प्रशिक्षित डॉक्टरों और तत्पर टीमों से लैस हैं। दुर्घटना या बीमारी में देरी जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन सही समय पर सही जगह पहुंचने से जीवन बच सकता है। रामकली बाई जैसी लाखों माताएं, बुजुर्ग अब बिना शहर जाने इलाज पा रहे हैं। यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रतीक है।आज जरूरत है कि हम सब इस उपलब्धि से प्रेरणा लें। पड़ोस में कोई गिर जाए, चोटिल हो जाए तो तुरंत जिला अस्पताल ले जाएं। अफवाहों में मत पड़ें कि “वहां कुछ नहीं होता”। बालोद जिला चिकित्सालय ने दिखाया है कि कुशल डॉक्टर + त्वरित कार्रवाई + टीम वर्क = असंभव को संभव। यह घटना हमें याद दिलाती है कि स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है, और उसे बचाने की जिम्मेदारी हम सबकी है—परिवार की, समाज की और सरकार की।रामकली बाई अब स्वस्थ होने की राह पर हैं। उनकी मुस्कान हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा खो चुका था। बालोद के डॉक्टरों और स्टाफ को सलाम! आपने न सिर्फ हड्डी जोड़ी, बल्कि उम्मीदों को भी मजबूत किया।आगे बढ़ो, स्वस्थ रहो, और दूसरों को भी प्रेरित करो—क्योंकि एक सफल ऑपरेशन हजारों को अस्पताल की ओर कदम बढ़ाने का हौसला देता है!

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