सतीश भैया सर्वधर्म समभाव के संग समाजसेवा का प्रखर प्रणेता

संपादक :- मीनू साहु
बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के देवरी बंगला की मिट्टी से जुड़े सतीश भैया केवल एक नाम नहीं, बल्कि विश्वास, विनम्रता और व्यापक सेवा का पर्याय हैं। क्रिश्चन समुदाय से संबंध रखते हुए भी उन्होंने स्वयं को किसी एक दायरे में सीमित नहीं किया। उनके लिए मानवता ही सर्वोच्च पहचान है। वे हर वर्ग, हर समाज, हर आयु समूह के लोगों के बीच समान आत्मीयता से खड़े दिखाई देते हैं। यही समावेशी सोच उन्हें विशिष्ट बनाती है।उनका हाथ जोड़कर किया गया अभिवादन केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि संस्कार और संवेदनशील नेतृत्व का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि सच्चा मार्गदर्शक वही है जो पहले स्वयं झुकना जानता हो। होली के रंगों के बीच उनका उत्साह सामाजिक एकता की सजीव मिसाल प्रस्तुत करता है। उनके प्रयासों में त्योहार केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि मेल-मिलाप, सौहार्द और भाईचारे को सुदृढ़ करने का माध्यम बन जाता है।सतीश भैया का उद्देश्य स्पष्ट है—समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहयोग पहुंचाना। वे जरूरतमंद परिवारों की सहायता, वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, युवाओं के मार्गदर्शन तथा जनहित के मुद्दों पर सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराते हैं। उनका कार्यक्षेत्र केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर निरंतर सक्रियता से परिपूर्ण है। विविध पृष्ठभूमि के लोगों के साथ उनकी सहभागिता यह दर्शाती है कि उनका प्रभाव व्यापक और सकारात्मक है।उनकी कार्यशैली पारदर्शिता, सहभागिता और समन्वय पर आधारित है। वे मानते हैं कि प्रगति का मार्ग सामूहिक प्रयासों से ही प्रशस्त होता है। किसी एक समुदाय को प्राथमिकता देने के बजाय वे सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि अलग-अलग विचारधाराओं के लोग भी उन पर भरोसा जताते हैं और उन्हें अपना प्रतिनिधि मानते हैं।भेद भाव की दीवारें गिराकर एकजुट होकर आगे बढ़ो। सेवा ही सच्ची साधना है और समाज की उन्नति ही सर्वोच्च लक्ष्य। उनके प्रयास वर्तमान को सशक्त बनाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए सद्भाव और सहयोग की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।
सतीश भैया वास्तव में ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिनका समर्पण, ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखता



