हमर छत्तीसगढ़

बिना भुगतान पूरा काम! मुंदेरा के सरपंच का दावा बना चर्चा का विषय, सिस्टम पर उठे सवाल

 

संपादक :- मीनू साहू

रिपोर्टर,:- उत्तम साहू

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के ग्राम पंचायत मुंदेरा जनपद पंचायत गुंडरदेही में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर अब एक नया और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। जहां एक ओर निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरपंच का यह बयान कि “अभी तक एक पैसा प्राप्त नहीं हुआ, फिर भी कार्य पूर्ण हो चुका है, केवल उद्घाटन शेष है” पूरे मामले को और भी गंभीर बना देता है। इस तरह का सरपंच हर जगह होनी चाहिए और सभी सरपंचों को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। सरपंच के इस कथन ने स्थानीय स्तर पर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना किसी वित्तीय भुगतान के कोई भी निर्माण कार्य कैसे पूरा हो सकता है? यदि वास्तव में राशि का आवंटन नहीं हुआ, तो निर्माण के लिए संसाधन कहां से आए? क्या यह कार्य बिना स्वीकृत स्टीमेट के किया गया या फिर विभागीय निगरानी पूरी तरह अनुपस्थित रही?प्राप्त जानकारी के अनुसार, निर्माण स्थल पर न तो सूचना बोर्ड लगाया गया है और न ही कार्य से संबंधित आवश्यक विवरण सार्वजनिक किए गए हैं। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। आमतौर पर किसी भी शासकीय कार्य में स्टीमेट, लागत, एजेंसी और समयसीमा का उल्लेख अनिवार्य होता है, जिससे आम नागरिक भी जानकारी प्राप्त कर सके। यहां इन सभी पहलुओं का अभाव कई शंकाओं को जन्म देता है।यदि सरपंच का बयान सही है, तो यह एक अलग ही मॉडल प्रस्तुत करता है, जहां बिना सरकारी राशि के कार्य पूर्ण किया गया। लेकिन यह भी जांच का विषय है कि कहीं यह नियमों की अनदेखी कर जल्दबाजी में किया गया निर्माण तो नहीं। बिना तकनीकी स्वीकृति और गुणवत्ता नियंत्रण के किया गया कार्य भविष्य में टिकाऊ रहेगा या नहीं, इस पर भी संदेह बना हुआ है।स्थानीय ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हुआ है या नहीं।जहां एक ओर यह दावा प्रेरणादायक प्रतीत होता है कि बिना भुगतान भी कार्य पूर्ण किया गया, वहीं दूसरी ओर यह प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आवश्यकता इस बात की है कि पूरे मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

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