सेवानिवृत्ति के बाद भी अटका हक जीपीएफ भुगतान के लिए दर-दर भटकती शिक्षिका

संपादक मीनू साहू
रिपोर्टर:- गोपाल निर्मलकर
दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में एक गंभीर मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। धमधा विकासखंड की एक सेवानिवृत्त उच्च श्रेणी शिक्षिका ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि सेवानिवृत्ति के छह माह बीत जाने के बाद भी उन्हें उनकी सामान्य भविष्य निधि (GPF) की राशि प्राप्त नहीं हुई है।
शिक्षिका 30 सितंबर 2025 को सेवा निवृत्त हो चुकी हैं, लेकिन आज तक उनका जीपीएफ भुगतान लंबित है। उन्होंने कई बार संबंधित विभागों में आवेदन दिए, अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। स्थिति यह है कि महालेखाकार रायपुर से स्वीकृति मिलने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस आर्थिक देरी का सीधा असर उनके पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है। उनके पति की हाल ही में बायपास सर्जरी हुई है और वर्तमान में उनका इलाज रायपुर के एक अस्पताल में जारी है। इलाज के खर्च को पूरा करने के लिए शिक्षिका को मजबूरन ब्याज पर कर्ज लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो गई है।
जनदर्शन में इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल जांच कर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
यह मामला न केवल एक व्यक्ति की परेशानी को दर्शाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस दिशा में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़ित शिक्षिका को कब तक उनका हक मिल पाता है।



