विकास की आड़ में हरियाली पर मौत का फरमान!
हजारों पेड़ों के सामूहिक कत्ल की तैयारी, आखिर किसके इशारे पर प्रकृति से यह खिलवाड़?

संपादक :- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में एक ओर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर विकास के नाम पर दशकों पुराने हजारों हरे-भरे वृक्षों को जड़ से मिटाने की तैयारी ने उन दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
वृक्ष मित्र सुनील शर्मा के अनुसार, प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत दुर्ग से बालोद मार्ग पर ग्राम लिमोरा, पैरी, लाटाबोड़, कंचान्दूर, डंगनिया, खप्परवाड़ा, गुंडरदेही सहित कई क्षेत्रों में अर्जुन (कहवा) के विशाल वृक्षों पर लाल निशान लगाए जा रहे हैं। यह दृश्य पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण का विरोध नहीं है, लेकिन क्या विकास का अर्थ केवल प्रकृति का विनाश है?
वर्षों से राहगीरों को छाया देने, वातावरण को शुद्ध रखने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने वाले इन वृक्षों को बिना व्यापक जनसुनवाई, स्पष्ट पर्यावरणीय मूल्यांकन और प्रभावी वैकल्पिक योजना सार्वजनिक किए ही समाप्त करने की तैयारी क्यों की जा रही है? यह सवाल अब पूरे क्षेत्र में गूंज रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा प्रक्रिया तेज कर दी गई है, लेकिन पेड़ों को बचाने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार होता दिखाई नहीं देता।
यदि सड़क चौड़ीकरण आवश्यक है तो ऐसी तकनीकी रूपरेखा क्यों नहीं अपनाई जा रही, जिससे अधिकतम वृक्ष सुरक्षित रह सकें? लोगों की मांग है कि किसी भी कटाई से पहले पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए और यदि पेड़ हटाना अपरिहार्य हो, तो वैज्ञानिक एवं प्रभावी प्रतिपूरक वृक्षारोपण के साथ उसकी दीर्घकालीन निगरानी भी सुनिश्चित की जाए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक होने चाहिए। यदि हजारों वृक्षों की बलि देकर सड़कें बनाई जाएंगी, तो आने वाले समय में बढ़ती गर्मी, प्रदूषण, भूजल संकट और जैव विविधता के नुकसान की भारी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ेगी।
अब सबसे बड़ा प्रश्न प्रशासन और जिम्मेदार एजेंसियों के सामने खड़ा है—क्या विकास के नाम पर हरियाली का अस्तित्व मिटा दिया जाएगा, या फिर ऐसी नीति अपनाई जाएगी जिसमें सड़क भी बने और प्रकृति भी सुरक्षित रहे? जनता पारदर्शिता, जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण के प्रति ठोस प्रतिबद्धता की अपेक्षा कर रही है।



