सरकारी जमीन पर बुलडोजर का कहर!
क्या रसूख के दम पर तालाब की भूमि पर कब्जे का खेल, प्रशासन आखिर कब जागेगा?

संपादक:- मीनू साहू
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ओझागहन के आश्रित ग्राम पड़कीभाट में वार्ड क्रमांक 12 के पंच द्वारा बिसनाथ तालाब के नीचे की सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरन साहू पिता खम्हन साहू द्वारा जेसीबी मशीन लगाकर बड़े-बड़े झाड़ उखाड़े जा रहे हैं और सरकारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इस घटनाक्रम ने ग्रामीणों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सार्वजनिक संपत्ति पर इस प्रकार खुली कार्रवाई की जा रही है, तो यह केवल जमीन पर कब्जे का प्रयास नहीं बल्कि शासन की व्यवस्था को खुली चुनौती भी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकारी भूमि पर भारी मशीनें कैसे पहुंचीं? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गईं?
बिसनाथ तालाब से जुड़ी भूमि केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि गांव की साझा धरोहर और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। यदि यहां कथित रूप से अतिक्रमण होता है, तो इसका असर आने वाले वर्षों तक ग्रामीणों के हितों पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में लापरवाही भविष्य में और अधिक अवैध कब्जों को बढ़ावा दे सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, राजस्व अभिलेखों का परीक्षण किया जाए और यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे या कब्जे के प्रयास की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कठोर कदम उठाए जाएं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस शिकायत पर तत्काल कार्रवाई कर सरकारी संपत्ति की रक्षा करेगा, या फिर प्रभावशाली लोगों के सामने सरकारी जमीन यूं ही कब्जे की भेंट चढ़ती रहेगी? ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।



