हमर छत्तीसगढ़

श्रमिकों के हक़ की बड़ी पहल योजनाओं की राशि सीधे खातों में, हजारों परिवारों को मिला सहारा

संपादक:- मीनू साहु 

दुर्ग :- छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के जीवन स्तर को मजबूत करने और उनके अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में श्रम विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई। दुर्ग जिले के भिलाई स्थित सिविक सेंटर कला मंदिर में आयोजित भव्य श्रमिक सम्मेलन के दौरान हजारों पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में स्थानांतरित की गई। यह पहल न केवल श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम है, बल्कि सरकार की श्रम कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करती है।सम्मेलन का उद्देश्य निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों को मंडल द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देना, उन्हें अधिकारों के प्रति जागरूक करना और अधिक से अधिक श्रमिकों को इन योजनाओं से जोड़ना था। इस अवसर पर बताया गया कि मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों को जीवन के विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कवच मजबूत हो सके।महिला श्रमिकों के लिए विशेष रूप से संचालित योजनाओं के तहत मातृत्व सहायता के रूप में आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाता है। वहीं श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई को प्रोत्साहन देने के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है, जिससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रोत्साहन के रूप में बड़ी राशि की सहायता का प्रावधान रखा गया है, ताकि श्रमिक परिवारों के बच्चे भी बड़े सपने देख सकें और उन्हें पूरा कर सकें।इसके अतिरिक्त श्रमिक परिवारों की सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विवाह सहायता, शिक्षा सहयोग, सुरक्षा उपकरण, कार्य औजार, साइकिल तथा सिलाई मशीन जैसी उपयोगी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। वरिष्ठ श्रमिकों के लिए विशेष सहायता योजना के तहत आर्थिक सहयोग दिया जाता है, जिससे उम्र के अंतिम पड़ाव में भी उन्हें सम्मानजनक जीवन मिल सके। दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए भी पर्याप्त सहायता राशि का प्रावधान किया गया है।कार्यक्रम के दौरान जिले के हजारों श्रमिकों को करोड़ों रुपये की सहायता राशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। यह पहल पारदर्शिता और तकनीकी व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिये के श्रमिकों तक पहुंचाने का उदाहरण बन रही है। साथ ही कुछ हितग्राहियों को स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ई-रिक्शा भी प्रदान किए गए।इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कहा कि श्रमिक समाज देश और प्रदेश के विकास की असली ताकत है। उनकी मेहनत से ही शहरों और गांवों की बुनियाद मजबूत होती है, इसलिए उनके अधिकारों और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रमिकों की भागीदारी देखने को मिली, जिसने यह संदेश दिया कि जागरूकता और सहभागिता से ही योजनाओं का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।

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