हमर छत्तीसगढ़

मदद के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा संगठित गिरोह का पर्दाफाश, लाखों की ठगी; सपा का तीखा हमला, गिरफ्तारी की मांग तेज

 

संपादक :- मीनू साहू 

राजनादगांव:- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में गरीब और जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता दिलाने का झांसा देकर सुनियोजित तरीके से लूट मचाने वाले गिरोह का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह मामला सिर्फ ठगी नहीं, बल्कि आम जनता के भरोसे के साथ खुला विश्वासघात है। समाजवादी पार्टी के नेताओं और पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने और सख्त धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग उठाई है।

जानकारी के मुताबिक, इस गिरोह के मुख्य चेहरे अशरफ सिद्दीकी और दाऊद सिद्दीकी लोगों को योजनाओं का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। पीड़ितों को मानव मंदिर चौक स्थित एक मोबाइल दुकान पर ले जाकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो और बायोमेट्रिक जानकारी हासिल की जाती थी। इसके बाद बिना जानकारी दिए उनके नाम पर महंगे मोबाइल, वॉशिंग मशीन और लैपटॉप जैसे सामान फाइनेंस कराए जाते थे। इस पूरी साजिश में करीब 8 लाख रुपए से अधिक की ठगी का आंकड़ा सामने आया है, जो और भी बढ़ सकता है।

पीड़ित दुलेवर साहू ने बताया कि उनके नाम पर 80 हजार रुपए का मोबाइल फाइनेंस कराया गया, लेकिन उन्हें कभी कोई सामान नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि आरोपी के नंबर पर ट्रूकॉलर में “छत्तीसगढ़ शासन” प्रदर्शित होता था, जिससे लोग उसे सरकारी व्यक्ति समझकर आसानी से फंस जाते थे। इस फर्जीवाड़े में निजी फाइनेंस कंपनियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है, जो मामले को और गंभीर बनाता है।

मामला तब और भड़क गया जब पीड़ितों ने आरोप लगाया कि आरोपी के पिता, जो शहर के एक प्रभावशाली वकील बताए जाते हैं, ने शिकायत करने पर उन्हें धमकाया। पीड़ितों का कहना है कि पैसे वापस मांगने पर उन्हें राजनीतिक पहुंच और ऊंचे संपर्कों का डर दिखाकर चुप रहने का दबाव बनाया गया।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. ओमप्रकाश साहू ने प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यह संगठित अपराध है और यदि पीड़ितों को किसी भी प्रकार की हानि होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी आरोपियों पर होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

अब बड़ी संख्या में सामने आ रहे पीड़ित इस बात का संकेत हैं कि यह घोटाला गहराई तक फैला हुआ है। सवाल यह है कि पुलिस कब तक सख्त कदम उठाकर इस गिरोह को कानून के शिकंजे में कसती है।

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