हमर छत्तीसगढ़

बालोद में कानून की खुलेआम मजाक ‘बाल विवाह मुक्त’ का तमगा बेनकाब”

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला प्रशासन के दावों की परतें अब एक-एक कर उधड़ रही हैं। अज्ञात सूत्रों ने बताया कि जिस जिले को “बाल विवाह मुक्त” बताकर वाहवाही लूटी जा रही थी, वहीं किसी गांव में कानून को सरेआम रौंद दिया गया। धनकर परिवार के एक युवक की शादी कर दी गई, जबकि स्कूल के रिकॉर्ड साफ बताते हैं कि उसकी उम्र अभी 21 वर्ष भी पूरी नहीं हुई है। यह कोई तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है।

अब इस मामले में सामने आई शादी की छपी हुई निमंत्रण पत्रिका (कार्ड) ने पूरे घटनाक्रम को और भी स्पष्ट कर दिया है।  अज्ञात सूत्रों से जानकारी के अनुसार 19 अप्रैल 2026 को “हल्दी माटी”, 20 अप्रैल को “तेल”, 21 अप्रैल को “बारात प्रस्थान एवं पानीग्रहण संस्कार” तथा 22 अप्रैल को “धरमटीकावन” जैसे विवाह कार्यक्रमों की पूरी रूपरेखा थी। यानी यह कोई छुपी हुई घटना नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से आयोजित विवाह था।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह सब हुआ कैसे? क्या प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुका है, या फिर जिम्मेदार लोगों ने जानबूझकर आंखें फेर लीं? गांव में शादी जैसे आयोजन छुपे नहीं रहते, फिर भी अगर संबंधित विभाग, पंचायत और बाल संरक्षण तंत्र को इसकी जानकारी नहीं हुई, तो यह उनकी अक्षमता है। और अगर जानकारी होने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया, तो यह सीधी मिलीभगत मानी जाएगी।बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत यह एक दंडनीय अपराध है। इसमें शामिल हर व्यक्ति—चाहे वह अभिभावक हो, रिश्तेदार, आयोजक या मौन सहमति देने वाला कोई भी—सभी पर कानूनी कार्रवाई होना अनिवार्य है।

जिला प्रशासन को यह समझना होगा कि “घोषणा” और “हकीकत” में जमीन-आसमान का फर्क अब जनता साफ देख रही है। यदि इस मामले में तुरंत FIR दर्ज नहीं होती, जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय नहीं होती और दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तो यह मान लिया जाएगा कि प्रशासन अपने ही दावों से पलट चुका है।यह घटना सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की नाकामी है जो बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने का दावा करता है। अब समय आ गया है कि बालोद प्रशासन दिखावे से बाहर निकले और जमीन पर कानून लागू करे—वरना “बाल विवाह मुक्त” का तमगा एक भद्दा मजाक बनकर रह जाएगा। इस बात की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा मुख्यमंत्री से लेकर उच्चाधिकारियों तक कर रहे हैं।

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