सरकारी संरक्षण में शराब तस्करी? जिला बालोद की अरकार भट्ठी बनी अवैध कारोबार का अड्डा प्रशासन की चुप्पी संदिग्ध

संपादक मीनू साहू
रिपोर्टर:- उत्तम साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गुरूर ब्लॉक के ग्राम पंचायत अरकार की सरकारी शराब भट्ठी अब सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की मिलीभगत का बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। पहले खुलासे के बाद भी कोई कार्रवाई न होना यह साबित करता है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। सवाल अब सीधा है—क्या यह सिर्फ अनदेखी है या फिर खुला संरक्षण?
भट्ठी से शराब को बोरी में भरकर खुलेआम बाहर भेजा जा रहा है, और यह सब किसी छुपे हुए तरीके से नहीं बल्कि दिनदहाड़े हो रहा है। अगर यह सब प्रशासन की नजर में नहीं है, तो यह उनकी अक्षमता है, और अगर नजर में होते हुए भी चुप्पी है, तो यह सीधी-सीधी संलिप्तता की ओर इशारा करता है। दोनों ही स्थिति में जवाबदेही तय होना जरूरी है।
आबकारी विभाग की भूमिका इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। जिस विभाग को अवैध बिक्री और परिवहन पर रोक लगानी चाहिए, वही यहां मूकदर्शक बना बैठा है। न कोई जांच, न कोई कार्रवाई—ऐसा लगता है मानो इस अवैध धंधे को खुली छूट दे दी गई हो। क्या विभाग को सच में कुछ पता नहीं, या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखा किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का गुस्सा अब फूटने लगा है। लगातार शिकायतों के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं होती, तो यह साफ संकेत है कि सिस्टम आम जनता की आवाज को दबाने में लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध शराब के कारण इलाके में नशे का जाल तेजी से फैल रहा है, और युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं। लेकिन प्रशासन के लिए यह सब जैसे कोई मुद्दा ही नहीं है।
यह मामला अब सिर्फ अवैध परिवहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है। अगर सरकारी भट्ठी ही अवैध कारोबार का केंद्र बन जाए, तो कानून और नियमों की बात करना बेमानी हो जाता है।
अब अगर इस मामले में भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह मान लेना चाहिए कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे खेल का हिस्सा हैं। बालोद प्रशासन को तुरंत जवाब देना होगा—कब तक यह खेल चलता रहेगा और आखिर किसके इशारे पर?



