बालोद के अरकार दारू भट्टी में कानून बेबस अवैध शराब और दबंगई के खिलाफ जनता का फूटा गुस्सा

संपादक :- मीनू साहू
रिपोर्टर :- उत्तम साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के ग्राम पंचायत अरकार, जिला बालोद तहसील गुरुर की यह तस्वीर केवल एक झगड़े का दृश्य नहीं है, बल्कि यह उस दादागिरी व्यवस्था का आईना है जहाँ कानून किताबों तक सीमित रह गया है और जमीनी हकीकत में कुछ लोगों की मनमानी चल रही है। अवैध शराब परिवहन जैसे गंभीर मुद्दे पर जनता का इस तरह भड़कना यह साफ संकेत देता है कि प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से विफल हो चुका है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है।
टिकेश्वर कोसगोदी और यशपाल देशमुख जैसे लोग, जिन पर अवैध गतिविधियों और दादागिरी के आरोप लग रहे हैं, आखिर किसके संरक्षण में यह सब कर रहे हैं? क्या यह संभव है कि इतने खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हों और जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने रहें? यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि शासन की नीयत पर भी गहरा संदेह पैदा करती है।
भट्टी में काम करने वाले लोगों द्वारा अपने “उसूल” चलाना और शासन के नियमों को दरकिनार करना यह दर्शाता है कि यहाँ कानून नहीं, बल्कि दबंगई का राज है। यह केवल एक गांव या एक भट्टी की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त उस बीमारी का उदाहरण है जहाँ भ्रष्टाचार और मिलीभगत ने जड़ें जमा ली हैं।
जनता का गुस्सा यूं ही नहीं फूटता। जब बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती, जब अवैध काम खुलेआम होते हैं और प्रशासन मौन रहता है, तब आम लोगों का भरोसा टूट जाता है। यह गुस्सा उसी टूटे हुए भरोसे का परिणाम है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? क्या कानून केवल आम जनता के लिए है और प्रभावशाली लोगों के लिए नहीं?
जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और कठोर जांच हो। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों। साथ ही, स्थानीय प्रशासन की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लापरवाही थी या मिलीभगत



