हमर छत्तीसगढ़

नगर पंचायत पलारी में 47 लाख की सड़क—विकास नहीं, भ्रष्टाचार की खुली परतें!

 

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में गुरूर तहसील के अंतर्गत नगर पंचायत पलारी में बनी लगभग 700 मीटर लंबी सड़क इन दिनों सवालों के घेरे में है। करीब 47 लाख रुपये की लागत से तैयार इस सड़क की हालत शुरुआत से ही संदिग्ध नजर आ रही है। तस्वीरें खुद गवाही दे रही हैं कि सड़क की गुणवत्ता बेहद खराब है—कहीं परत उखड़ रही है, कहीं सतह असमान है, तो कहीं-कहीं शुरुआती दरारें साफ दिख रही हैं। यह हाल तब है जब सड़क अभी नई-नई बनी है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े बजट के बावजूद निर्माण में पारदर्शिता पूरी तरह गायब क्यों है? निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया, जबकि यह हर सरकारी कार्य में अनिवार्य होता है। जब इस बारे में संबंधित इंजीनियर से पूछा गया तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “सूचना बोर्ड का कोई प्रावधान नहीं है।” और तो और संवाददाता को ही धमकी देते हुए पूछ रहा है की सूचना बोर्ड कहां लगाऊं रोड में  लगाऊं क्या  यह बयान खुद में कई सवाल खड़े करता है—क्या नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया या फिर कुछ छिपाने की कोशिश है?हैरानी की बात तो यह है कि जिम्मेदार इंजीनियर को यह तक जानकारी नहीं कि सड़क कितने इंच मोटी बनाई जा रही है। यह सीधी-सी बात है कि जब तकनीकी अधिकारी ही अनजान हैं, तो निर्माण कार्य किस स्तर पर हुआ होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क बनने के कुछ ही समय में उसकी हालत बिगड़ने लगी है। जगह-जगह कमजोर सतह और पैचवर्क यह साबित करते हैं कि निर्माण में या तो घटिया सामग्री का उपयोग हुआ है या फिर गुणवत्ता मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर 47 लाख रुपये गए कहां? क्या यह जनता के टैक्स के पैसों की खुली लूट नहीं है? नगर पंचायत पलारी के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी इस पूरे मामले को और संदिग्ध बना रही है।जरूरत है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और जनता को सच्चाई बताई जाए। अन्यथा “विकास” के नाम पर ऐसे ही भ्रष्टाचार होता रहेगा और आम जनता बदहाल सड़कों पर चलने को मजबूर रहेगी।

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