हरियाली का हत्यारा सिस्टम नहर विभाग में ‘टाइमकीपर’ की आड़ में पेड़ों की खुलेआम लूट!

संपादक:- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला का ताजा मामला ग्राम पंचायत अरकार के नहर पार क्षेत्र का है, जहां कथित रूप से सुरेश साहू नामक व्यक्ति, जो खुद को नहर विभाग में टाइमकीपर बताता है, ने गीली लकड़ी को सूखी बताकर करीब 10 पेड़ों को बिना किसी वैधानिक नीलामी प्रक्रिया के बेच दिया।
देश एक तरफ पर्यावरण बचाने, पेड़ लगाने और हरियाली बढ़ाने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर कुछ गैर-जिम्मेदार लोग सरकारी तंत्र का सहारा लेकर प्रकृति की खुली हत्या कर रहे हैं।यह घटना केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर सीधा तमाचा है। सवाल यह उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल खेला गया? क्या विभाग के उच्च अधिकारी इससे अनजान हैं या फिर सब कुछ उनकी मौन सहमति से हो रहा है? बिना नीलामी के पेड़ों की बिक्री साफ तौर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत की बू दे रही है।
जब देश का नेतृत्व बार-बार पर्यावरण संरक्षण की अपील कर रहा है, “एक पेड़ माँ के नाम” जैसे अभियानों के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है, तब ऐसे लोग चंद पैसों के लालच में पेड़ों का सौदा कर रहे हैं। यह न केवल पर्यावरण के साथ विश्वासघात है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी खिलवाड़ है।
स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में क्षेत्र पूरी तरह बंजर हो जाएगा। प्रशासन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है? क्या विभागीय कर्मचारी नियमों से ऊपर हैं?
जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और सख्त जांच हो। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। वरना “हरियाली बचाओ” के नारे सिर्फ कागजों में ही दम तोड़ते रह जाएंगे, और जमीनी हकीकत में पेड़ों की कटाई का यह काला खेल यूं ही चलता रहेगा।



