हमर छत्तीसगढ़

सरकारी जमीन पर निजी साम्राज्य!” — भिलाई स्टील प्लांट की भूमि पर अवैध फैक्ट्री से भड़का कोंडेकसा, प्रशासन पर संरक्षण देने का आरोप

 

संपादक:- मीनू साहू

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के कोंडेकसा गांव में उस वक्त आक्रोश फूट पड़ा जब ग्रामीणों ने भिलाई स्टील प्लांट (SAIL) की जमीन पर संचालित जगन्नाथ स्टील पावर प्लांट को “पूरी तरह अवैध” बताते हुए धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस भूमि को देशहित, उद्योग और क्षेत्रीय विकास के नाम पर भिलाई स्टील प्लांट को सौंपा गया था, उसी जमीन पर अब निजी फैक्ट्री मालिकों ने सत्ता और प्रशासन की मिलीभगत से कब्जा जमा लिया है।ग्रामीणों का कहना है कि यह फैक्ट्री बिना वैध अनुमति, बिना भूमि परिवर्तन और बिना जनसहमति के गांव के बीचों-बीच धड़ल्ले से चलाई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर प्रशासन की आंखों के सामने सरकारी जमीन पर निजी उद्योग कैसे खड़ा हो गया? क्या नियम-कानून सिर्फ गरीबों और किसानों के लिए हैं?

फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों ने भी बड़ा खुलासा किया है। श्रमिकों के अनुसार उन्हें दिनभर खतरनाक माहौल में काम करवाकर केवल 300 से 400 रुपये मजदूरी दी जा रही है। न सुरक्षा, न श्रम कानूनों का पालन और न ही कोई मानवीय व्यवस्था। यह सीधे-सीधे मजदूरों के शोषण और श्रम कानूनों की हत्या का मामला बनता जा रहा है।मामला तब और गंभीर हो गया जब ग्रामीणों ने बताया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के कारण राज्यपाल को शिकायत भेजी गई थी, जिस पर राजभवन से कार्रवाई के आदेश भी जारी हुए। लेकिन महीनों बाद भी प्रशासन मौन बैठा है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि राज्यपाल के आदेश तक को अधिकारी कूड़ेदान में फेंक रहे हैं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद आखिर किससे करे?
फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी (FDLP) ने भी आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध संचालन बंद नहीं हुआ तो फैक्ट्री की तालाबंदी कर दी जाएगी। गांव में अब “जमीन बचाओ, अधिकार बचाओ” का नारा गूंज रहा है।

कोंडेकसा का यह आंदोलन अब सिर्फ एक फैक्ट्री का विरोध नहीं, बल्कि सरकारी जमीनों के निजीकरण, आदिवासी अधिकारों के दमन और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ जनआक्रोश का प्रतीक बन चुका है। ग्रामीणों ने साफ कह दिया है — “अब चुप नहीं बैठेंगे, चाहे सड़क जाम करनी पड़े या फैक्ट्री बंद।”

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