AD न्यूज के खबर का असर दल्ली राजहरा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सुरेश साहू का ऐतिहासिक फैसला, BSP के कोंकाण जमरुआ प्रोजेक्ट पर लगाया ‘स्टे’

संपादक:- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में दल्ली राजहरा क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों के हक में लगातार AD न्यूज ने खबर दिखाया जिनका असर हुआ कि दल्ली राजहरा न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सुरेश साहू ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने न केवल शासन-प्रशासन बल्कि उद्योग जगत में भी हलचल मचा दी है। भारत सरकार के उपक्रम भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के प्रस्तावित जमरुआ ग्राम की भूमि खसरा क्रमांक 79 और 130 पर न्यायालय ने स्टे (स्थगन आदेश) जारी कर दिया है।
*फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी की बड़ी जीत*
इस कानूनी लड़ाई को मुकाम तक पहुँचाने में फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी (FDLP) की भूमिका सबसे अहम रही। जैसे ही फैसले की घोषणा हुई, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने पार्टी का आभार व्यक्त किया।यह केवल जमीन का टुकड़ा नहीं,बल्कि ग्रामीणों के अस्तित्व की लड़ाई थी। न्यायालय के इस फैसले ने लोकतंत्र और न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास और मजबूत किया है।” — क्षेत्रवासी दिग्गज वकीलों की फौज ने हिला दी BSP की नींव इस केस की पैरवी सामान्य नहीं थी। ग्रामीणों के पक्ष को मजबूती से रखने के लिए FDLP के दिग्गजों ने मोर्चा संभाला था शिवशंकर सिंह गौर (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, FDLP) – जिनके नेतृत्व में रणनीति तैयार की गई।अधिवक्ता महेंद्र साहू: (प्रदेश अध्यक्ष, FDLP) – जिन्होंने कानूनी बारीकियों से BSP के दावों को चुनौती दी।हाईकोर्ट की टीम इनके साथ दर्जनों उच्च न्यायालय बिलासपुर के अनुभवी अधिवक्ताओं कुणाल भंसाली ,गोपाल सोनी, संतोषी सलामे ,शौरभ मिलिंद सहित अन्य ने पैरवी की, जिसके प्रभावी और पुख्ता दलीलों के आगे BSP प्रबंधन को पीछे हटना पड़ा।
*क्यों ‘खतरनाक’ और ‘ऐतिहासिक’ है यह फैसला?*
यह खबर उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो विकास के नाम पर ग्रामीणों के हितों की अनदेखी करते हैं।जमीन का अधिकार खसरा क्रमांक 79 और 130 पर स्टे लगने से अब बिना ग्रामीणों की मर्जी और कानूनी प्रक्रिया के BSP वहां कोई काम नहीं कर सकेगी।मजदूर और किसान एकता:* FDLP ने यह साबित कर दिया कि यदि नेतृत्व मजबूत हो, तो दिल्ली की सत्ता के अधीन आने वाले उपक्रमों से भी हक छीना जा सकता है।
*क्षेत्र में जश्न का माहौल*
दल्ली राजहरा और जमरुआ के ग्रामीणों ने इस जीत को “अन्याय पर न्याय की जीत” करार देते हुए शिवशंकर सिंह गौर और महेंद्र साहू का भव्य स्वागत करने की तैयारी की है। आने वाले दिनों में इस फैसले का असर अन्य विवादित भूमि अधिग्रहण मामलों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।



