झूठे आरोपों की साजिश का दस्तावेजों ने खोली पोल शिकायतकर्ता और कुछ असामाजिक तत्व हुए बेनकाब

संपादक :- मीनू साहू
बालोद/गुरुर।:- सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में एक किसान और कंपनी पर लगाए जा रहे करोड़ों रुपये की ठगी के आरोप अब सवालों के घेरे में आ गए हैं। सामने आए दस्तावेज, नोटरी शपथ पत्र, सहमति पत्र और राजस्व अभिलेख यह संकेत दे रहे हैं कि मामला वैसा नहीं है जैसा प्रचारित किया जा रहा है। दस्तावेजों के अनुसार संबंधित किसानों और कंपनी के बीच वर्ष 2019 से 2021 के दौरान आपसी सहमति से अनुबंध हुआ था, जिसमें जमीन उपयोग और भुगतान की शर्तें स्पष्ट रूप से दर्ज थीं।
वायरल संदेशों में आरोप लगाया जा रहा था कि किसानों से करोड़ों रुपये लेकर धोखा किया गया, लेकिन सामने आए दस्तावेजों में कई किसानों द्वारा स्वयं हस्ताक्षरित सहमति और भुगतान संबंधी जानकारी दर्ज मिली है। कुछ दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि संबंधित पक्षों के बीच विवाद होने पर आपसी बातचीत से समाधान निकालने की सहमति बनी थी। इसके बावजूद अब सात साल पुराने मामले को नए तरीके से प्रस्तुत कर राजनीतिक और सामाजिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश किए जाने की चर्चा तेज हो गई है।
दस्तावेजों में नोटरी प्रमाणित एग्रीमेंट, राजीनामा और शपथ पत्र भी शामिल हैं, जिनमें कई लोगों ने स्वेच्छा से हस्ताक्षर किए हैं। यही नहीं, कुछ रिकॉर्ड में रकम वापसी और समझौते का उल्लेख भी देखने को मिला है। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को आपत्ति थी तो वह तत्काल कानूनी कार्रवाई करता, लेकिन लंबे समय तक चुप रहने के बाद अचानक सोशल मीडिया में आरोप लगाना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना जांच किसी व्यक्ति या संस्था की छवि खराब करना गलत है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप झूठे पाए जाते हैं तो अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। ग्रामीणों का कहना है कि सोशल मीडिया में अधूरी जानकारी फैलाकर माहौल खराब करना उचित नहीं है।
फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सके कि सच्चाई क्या है और आखिर सात साल पुराने मामले को अचानक उछालने के पीछे मंशा क्या है।



