ज्ञानेश्वरी यादव ने लोहे से नहीं, अपने हौसले से इतिहास उठाया — शिव शंकर गौर

संपादक :- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ की धरती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां की बेटियां अवसर नहीं, बल्कि इतिहास गढ़ती हैं। ज्ञानेश्वरी यादव ने सीनियर एशियाई वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 53 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर और कांस्य पदक जीतकर पूरे देश के सामने छत्तीसगढ़ का परचम लहरा दिया। यह सिर्फ पदक नहीं, बल्कि संघर्ष, तपस्या और आत्मविश्वास की वह चमक है जिसने हर युवा को प्रेरित कर दिया है।इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर सामाजिक कार्यकर्ता शिव शंकर गौर ने ज्ञानेश्वरी की जमकर सराहना करते हुए कहा कि “जिस उम्र में कई लोग सपनों से डर जाते हैं, उस उम्र में ज्ञानेश्वरी ने दुनिया को चुनौती देकर बता दिया कि छत्तीसगढ़ की बेटियां किसी से कम नहीं हैं। उसने लोहे का वजन नहीं उठाया, बल्कि पूरे प्रदेश का सम्मान अपने कंधों पर उठाया है।”
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश्वरी की जीत उन लोगों के मुंह पर करारा जवाब है जो छोटे शहरों और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली प्रतिभाओं को कम आंकते हैं। राजनांदगांव की इस बेटी ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती। यह जीत हर उस बेटी के लिए संदेश है जो अपने सपनों को समाज के डर से दबा देती है।
शिव शंकर गौर ने आगे कहा, “आज जरूरत सिर्फ तालियों की नहीं, बल्कि ऐसी प्रतिभाओं को हर स्तर पर मजबूत समर्थन देने की है। खेल मैदानों में पसीना बहाने वाले युवा ही देश का भविष्य बदलते हैं। ज्ञानेश्वरी ने छत्तीसगढ़ की नई पहचान गढ़ी है — संघर्ष, साहस और सफलता की पहचान।”
उन्होंने प्रदेश सरकार और खेल विभाग से मांग की कि ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं, आधुनिक प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग तत्काल उपलब्ध कराया जाए, ताकि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ केवल भागीदारी नहीं, बल्कि विश्व खेल मंच पर दबदबा कायम करे। ज्ञानेश्वरी यादव की यह सफलता केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के आत्मविश्वास की जीत है। आज हर युवा की जुबान पर एक ही नाम है — ज्ञानेश्वरी, जिसने साबित कर दिया कि मेहनत जब जुनून बन जाए, तब पदक नहीं, इतिहास बनता है।



