नवांगमन के विशेषांक का भव्य विमोचन, साहित्यिक चेतना के नए अध्याय का शुभारंभ

संपादक:- मीनू साहू
बालोद/दल्ली राजहरा:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में साहित्य, संस्कृति और लोकचेतना को समर्पित प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका “नवांगमन” के विशेषांक का भव्य विमोचन 02 जून 2026 को लौह नगरी दल्ली राजहरा स्थित माथुर निवास, मेनरोड राजहरा में गरिमामय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। समारोह में प्रदेश के अनेक साहित्यकारों, शिक्षाविदों, चिंतकों, कलाकारों एवं साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने साहित्यिक जगत में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
डॉ. शिरोमणि माथुर पर केन्द्रित इस विशेषांक का विमोचन साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी रचनाकार के जीवन, संघर्ष, विचार और साहित्यिक अवदान को समर्पित विशेषांक केवल सम्मान का प्रतीक नहीं होता, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत भी बनता है।
समारोह की मुख्य अतिथि राजमाता फुलवादेवी कांगे रहीं। कार्यक्रम में कंगला मांझी संगठन की प्रमुख अध्यक्ष, जी आर राना (पूर्व अखिल भारतीय आदिवासी हलबा समाज एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी), कमलेश चंद्राकर तथा मुनीलाल निषाद की गरिमामयी उपस्थिति रही। वहीं विशेष अतिथि वक्ता डॉ. अशोक आकाश, श्रीमती स्मिता वर्मा एवं कु. राजकुमारी कांगे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
पत्रिका के संपादक डॉ. परदेशीराम वर्मा द्वारा आयोजकीय उद्घाटन किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “नवांगमन” का उद्देश्य साहित्य को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, लोकसंस्कृति का संरक्षण करना तथा जनचेतना को नई दिशा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि पत्रिका निरंतर ऐसे विषयों को मंच दे रही है जो समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं।साहित्यकार डॉ. अशोक आकाश ने विशेषांक की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि परिवर्तन का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने नवांगमन द्वारा साहित्यिक विमर्श को नई दिशा देने के प्रयास को सराहनीय बताते हुए इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण मंच बताया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रजनी नेलसन ने किया। समारोह के अंत में श्रीमती नेहा माथुर ने आभार प्रदर्शन करते हुए उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों और सहभागियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि आज के डिजिटल और त्वरित सूचना युग में भी गंभीर साहित्यिक पत्रिकाओं की प्रासंगिकता बनी हुई है। “नवांगमन” जैसी पत्रिकाएँ विचार, संवाद और सृजन की परंपरा को जीवंत बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।कार्यक्रम के आयोजन में अब्दुल कलाम (सह संचालक, नव आगमन) तथा नीतीश वर्मा (सह संपादक, नव आगमन) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समारोह के अंत में सभी अतिथियों ने पत्रिका की निरंतर सफलता की कामना करते हुए कहा कि “नवांगमन” वास्तव में साहित्य, संस्कृति और लोकचेतना का सशक्त हस्ताक्षर बनकर उभर रहा है।



