विदेशी मदिरा दुकान के विरोध में भाजपा–कांग्रेस का संगम!

संपादक:- मीनू साहू
चिखलाकसा। नगर पंचायत चिखलाकसा में प्रस्तावित विदेशी मदिरा दुकान के विरोध ने अब महज स्थानीय मुद्दे का रूप नहीं रखा है, बल्कि इसने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। विरोध प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रशांत बाला बोकड़े के साथ नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कुंती देवांगन और वार्ड क्रमांक 3 के पार्षद ताराचंद पाथवड़े का एक साथ बैठना अब नगर में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार है, उसी दौर में भाजपा समर्थित नगर पंचायत अध्यक्ष और भाजपा से जुड़े निर्वाचित पार्षद आखिर यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के साथ खड़े होकर सरकार की नीति से जुड़े मुद्दे पर विरोध का हिस्सा क्यों बने?
यह दृश्य केवल एक विरोध प्रदर्शन की तस्वीर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे लेकर भाजपा संगठन की राजनीतिक दिशा और अनुशासन व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अपनी ही सरकार के फैसले के खिलाफ भाजपा के जनप्रतिनिधि?
नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कुंती देवांगन को भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है, जबकि वार्ड क्रमांक 3 के पार्षद ताराचंद पाथवड़े भी भाजपा से जुड़े निर्वाचित प्रतिनिधि बताए जाते हैं। ऐसे में यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष के साथ विदेशी मदिरा दुकान के विरोध में एक मंच पर बैठने की तस्वीर ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
सवाल यह नहीं कि शराब दुकान का विरोध किया जाना चाहिए या नहीं। सवाल यह है कि भाजपा के जनप्रतिनिधि यदि अपनी ही सरकार के कार्यकाल में किसी नीतिगत निर्णय का विरोध कर रहे हैं, तो क्या उन्होंने संगठन को विश्वास में लिया था?
यदि लिया था तो भाजपा संगठन की आधिकारिक स्थिति क्या है? और यदि नहीं लिया था, तो फिर संगठन की अनुशासन व्यवस्था किसके लिए है?
क्या संगठन के नियम सिर्फ कार्यकर्ताओं तक सीमित हैं?
भाजपा अपनी मजबूत संगठनात्मक संरचना और अनुशासन के लिए जानी जाती है। ऐसे में चिखलाकसा की घटना ने एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है—क्या संगठन अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए भी वही मापदंड लागू करेगा, जो सामान्य कार्यकर्ताओं पर लागू होते हैं?
नगर की जनता पूछ रही है—
क्या भाजपा संगठन नगर पंचायत अध्यक्ष कुंती देवांगन से स्पष्टीकरण मांगेगा?
क्या पार्षद ताराचंद पाथवड़े से पूछा जाएगा कि वे किस राजनीतिक मंच और किस निर्णय के विरोध में बैठे थे?
क्या संगठन इस विरोध प्रदर्शन को पार्टी लाइन के विपरीत मानेगा?
क्या इस मामले में कारण बताओ नोटिस अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?
या फिर मामला केवल इसलिए दबा दिया जाएगा क्योंकि विरोध में बैठने वाले लोग निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं?
चिखलाकसा में बढ़ी सियासी बेचैनी
विदेशी मदिरा दुकान को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध पहले से चर्चा में है, लेकिन भाजपा समर्थित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब निगाहें भाजपा संगठन पर टिक गई हैं।
यदि पार्टी इसे व्यक्तिगत या स्थानीय नागरिक मुद्दा मानती है, तो संगठन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि इसे पार्टी अनुशासन से जोड़कर देखा जाता है, तो कार्रवाई का रास्ता भी साफ होना चाहिए।
चिखलाकसा की जनता अब केवल शराब दुकान पर फैसला नहीं चाहती, बल्कि यह भी जानना चाहती है कि भाजपा संगठन अपने जनप्रतिनिधियों के मामले में अनुशासन का डंडा चलाएगा या राजनीतिक सुविधा के हिसाब से नियम बदल जाएंगे?
अब गेंद भाजपा संगठन के पाले में है। स्पष्टीकरण आएगा या खामोशी छाई रहेगी? कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
चिखलाकसा की सियासत में यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा गर्म है—



