हमर छत्तीसगढ़

26 साल बाद भी गूंजता है शहीद दुर्वासा लाल निषाद का शौर्य

पूर्व सैनिकों ने कहा—शहादत को भूलना राष्ट्र के प्रति कृतघ्नता होगी

संपादक:- मीनू साहू 

बालोद। कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीद दुर्वासा लाल निषाद के 26वें शहादत दिवस पर पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जिला बालोद के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में शहीद की प्रतिमा एवं चित्र पर माल्यार्पण कर उनके अद्वितीय साहस और बलिदान को नमन किया गया।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष पूर्व सैनिक नंदकिशोर साहू, प्रदेश मीडिया प्रभारी पूर्व सैनिक देवेंद्र डड़सेना, सह-सचिव पूर्व सैनिक कोमल साहू एवं पूर्व सैनिक देव कुमार साहू प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

जिलाध्यक्ष नंदकिशोर साहू ने कहा कि कारगिल युद्ध भारतीय सेना के पराक्रम और अदम्य साहस का ऐतिहासिक प्रमाण है। वर्ष 1999 में विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भारतीय सैनिकों ने दुश्मन के खिलाफ जिस बहादुरी से मोर्चा संभाला, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि अमर शहीद दुर्वासा लाल निषाद का बलिदान केवल बालोद की धरोहर नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि शहीदों को याद करने का उद्देश्य सिर्फ श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करना नहीं होना चाहिए। उनके त्याग की भावना को समाज और युवा पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। देश की आजादी और सीमाओं की सुरक्षा के पीछे सैनिकों का त्याग छिपा है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना चाहिए।

प्रदेश मीडिया प्रभारी देवेंद्र डड़सेना ने कहा कि सैनिक सेवा से सेवानिवृत्त हो सकता है, लेकिन राष्ट्रसेवा की भावना से कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक सेवा परिषद शहीदों के सम्मान और उनके परिवारों के साथ खड़े रहने के लिए सदैव तत्पर है।

कार्यक्रम में भारत माता के जयघोष और “अमर शहीद दुर्वासा लाल निषाद अमर रहें” के नारों से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से भर गया। उपस्थित लोगों ने शहीद की स्मृति को नमन करते हुए देश की एकता और अखंडता की रक्षा का संकल्प लिया।

पूर्व सैनिकों ने युवाओं से अपील की कि वे शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेकर अनुशासन, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि शहीदों की तस्वीर पर फूल चढ़ाना सम्मान की शुरुआत हो सकती है, लेकिन उनके आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

अमर शहीद दुर्वासा लाल निषाद की 26वीं शहादत दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम समाज को यह संदेश दे गया कि राष्ट्र की रक्षा में दिए गए बलिदान की कीमत समय बीतने के साथ कम नहीं होती—बल्कि हर पीढ़ी की जिम्मेदारी बढ़ती जाती है कि वह अपने वीर सपूतों की गाथा को जीवित रखे।

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