रोजगार मेले खूब, बालोद के युवाओं को नौकरी कब?
13.40 लाख पंजीयन के बीच स्थानीय अवसरों का सूखा—प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

संपादक:- मीनू साहू
बालोद। प्रदेश में बेरोजगारी दूर करने के लिए सरकार रोजगार मेले और प्लेसमेंट कैंपों को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है। सरकारी रोजगार पोर्टल पर 13,40,349 पंजीयन दर्ज हैं। सितंबर 2026 तक प्रदेश में 192 रोजगार मेले आयोजित, 18,239 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू और 7,308 चयन दर्ज किए गए हैं। आंकड़े सरकारी अभियान की तस्वीर जरूर दिखाते हैं, मगर बालोद के युवा पूछ रहे हैं—इनमें उनके हिस्से का वास्तविक रोजगार कितना आया?
जिले में आयोजित रोजगार गतिविधियों की स्थिति पर नजर डालें तो तस्वीर और स्पष्ट होती है। 12 जून 2026 को कलेक्टर परिसर में आयोजित मेले में सुरक्षा गार्ड, सुपरवाइजर, ट्रेनिंग ऑफिसर, मार्केटिंग मैनेजर और फील्ड ऑफिसर सहित विभिन्न पद रखे गए थे। मगर कई अवसरों का कार्यस्थल बालोद से बाहर दुर्ग-भिलाई और रायपुर जैसे शहरों में था। रोजगार के लिए अपने जिले से बाहर जाना गलत नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि बालोद में ही पर्याप्त अवसर पैदा करने की दिशा में कितना काम हुआ?
इसके बाद 14 अगस्त 2026 को गुरूर के शासकीय आईटीआई में रोजगार मेला हुआ। आधिकारिक सूची में विभिन्न क्षेत्रों के कुल 803 पद दर्ज थे। इनमें अकेले टेक्नीशियन के 520 पद, सुरक्षा गार्ड के 100, सुरक्षा सुपरवाइजर के 50, ट्रेनिंग ऑफिसर के 50, सेल्स ऑफिसर और प्रतिनिधि के 30-30 पद शामिल थे। लेकिन इन अवसरों का बड़ा हिस्सा जिले के बाहर उपलब्ध था।
कलेक्टर के नेतृत्व पर क्यों उठ रहे सवाल?
जिला प्रशासन का दायित्व केवल कैंप आयोजित करने तक सीमित नहीं माना जा सकता। स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन, निवेश आकर्षित करना, कृषि एवं खनिज आधारित कारोबार विकसित करना, स्वरोजगार को बढ़ाना तथा कौशल प्रशिक्षण को स्थानीय बाजार की जरूरत से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।
यहीं प्रशासनिक नेतृत्व की परीक्षा होती है। कलेक्टर को यह बताना चाहिए कि बालोद में इस वर्ष कितने नए निजी रोजगार बने? कितने स्थानीय युवाओं को नियुक्तियां मिलीं? कितने प्रशिक्षित उम्मीदवार नौकरी तक पहुंचे? और रोजगार मेलों में चयन के बाद कितनों ने वास्तविक रूप से कार्यभार संभाला?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य पोर्टल पर प्रदेश का चयन आंकड़ा उपलब्ध है, लेकिन बालोद के लिए चयन से लेकर नियुक्ति तक की स्पष्ट सार्वजनिक तस्वीर सामने नहीं आती। इससे सरकारी योजनाओं के वास्तविक परिणाम को लेकर सवाल पैदा होना स्वाभाविक है।
युवा आंकड़े नहीं, अवसर मांग रहे
बालोद कृषि और खनिज संसाधनों से समृद्ध जिला है। फिर भी यदि यहां का शिक्षित वर्ग रोजगार के लिए रायपुर, भिलाई, नागपुर या अन्य शहरों की ओर जाने को मजबूर है, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक योजना दोनों की समीक्षा जरूरी है।
अब जरूरत रोजगार मेले गिनाने की नहीं, बल्कि नियुक्ति और स्थायी आय का हिसाब देने की है।
बालोद के युवाओं का सीधा सवाल है—रोजगार के लिए पंजीयन तो हो गया, इंटरव्यू भी हो गया, चयन भी हो गया… लेकिन अपने जिले में नौकरी कब मिलेगी?



