GSDP का ग्राफ चढ़ा, जनता की जेब क्यों उतरी? मोंटू चंद्राकर ने भाजपा सरकार से पूछा—आखिर विकास का फायदा किसे मिला?
आंकड़ों में छत्तीसगढ़ समृद्ध, जमीन पर जनता परेशान! मोंटू चंद्राकर का भाजपा पर करारा हमला—‘ग्रोथ दिखती है तो आमदनी क्यों नहीं?’

संपादक :- मीनू साहू
छत्तीसगढ़ में भी ‘ग्रोथ’ का ढोल, लेकिन जनता की जेब में सन्नाटा! मोंटू चंद्राकर ने भाजपा सरकार को घेरा—“GSDP बढ़ा तो आम आदमी की आय क्यों नहीं?”
बालोद/गुण्डरदेही :- देश में 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। बालोद जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मोंटू चंद्राकर ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों का जश्न मनाने में लगी है, लेकिन जनता के घर का बजट, रोजगार और वास्तविक आमदनी इस कथित विकास की कहानी से मेल नहीं खा रही है।
मोंटू चंद्राकर ने कहा कि “अगर अर्थव्यवस्था सचमुच मजबूत हो रही है तो इसका असर आम आदमी की जिंदगी में दिखाई देना चाहिए। केवल GDP और GSDP के आंकड़े बढ़ जाने से विकास साबित नहीं होता। जनता यह जानना चाहती है कि उसकी आमदनी कितनी बढ़ी, रोजगार कितने मिले और महंगाई से कितनी राहत मिली?”
छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक बजट दस्तावेज के अनुसार राज्य का GSDP 2025-26 में ₹6.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹7.09 लाख करोड़ अनुमानित किया गया है। यानी सरकारी अनुमान में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता का सवाल है कि इस बढ़ोतरी का वास्तविक लाभ गांव के किसान, खेतिहर मजदूर, बेरोजगार युवा और छोटे दुकानदार तक कितना पहुंचा?
इससे पहले राज्य सरकार के बजट दस्तावेज में 2024-25 के लिए छत्तीसगढ़ की प्रति व्यक्ति आय ₹1,62,870 और वृद्धि दर 9.37 प्रतिशत बताई गई थी। वहीं उसी दस्तावेज में भारत की प्रति व्यक्ति आय ₹2,00,162 बताई गई थी।
मोंटू चंद्राकर ने इसी अंतर को मुद्दा बनाते हुए भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि “सरकारी कागज पर प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है, लेकिन बाजार में आम परिवार की खरीदारी क्षमता का क्या हाल है? किसान की लागत बढ़ रही है, मजदूर के सामने नियमित रोजगार का संकट है और छोटे व्यापारियों की बिक्री पर दबाव है। फिर यह ग्रोथ आखिर किसकी जेब में जा रही है?”
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में राज्य की स्थिर कीमतों पर GSDP वृद्धि 7.5 प्रतिशत रही, जबकि कृषि क्षेत्र की वृद्धि 5.38 प्रतिशत, उद्योग की 6.92 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की 8.54 प्रतिशत बताई गई।
कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है कि भाजपा सरकार आंकड़ों की चमक को राजनीतिक उपलब्धि की तरह पेश कर रही है, जबकि आर्थिक विकास का असली परीक्षण जमीन पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उद्योग बढ़ रहे हैं तो स्थानीय युवाओं को कितनी नौकरियां मिलीं? यदि कृषि बढ़ी है तो किसानों की वास्तविक आय कितनी बढ़ी? यदि सेवा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है तो छोटे दुकानदार और स्वरोजगार करने वालों की कमाई में कितना सुधार हुआ?
चंद्राकर ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “GDP का प्रतिशत गरीब की रसोई नहीं भरता, GSDP का ग्राफ बेरोजगार युवक को नौकरी नहीं देता और बजट की मोटी किताब किसान के कर्ज का बोझ कम नहीं करती। सरकार को आंकड़ों का जश्न मनाने के बजाय जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।”
उन्होंने पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग द्वारा GDP आंकड़ों और नई गणना पद्धति को लेकर उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए कहा कि जब आर्थिक आंकड़ों की व्याख्या पर विशेषज्ञ ही सवाल उठा रहे हैं, तब सरकार को इन्हें राजनीतिक प्रचार का हथियार बनाने के बजाय पारदर्शी तरीके से जनता के सामने वास्तविक तस्वीर रखनी चाहिए।
मोंटू चंद्राकर ने भाजपा सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि “देश और प्रदेश की तरक्की का प्रमाण भाषण नहीं, जनता की जिंदगी होनी चाहिए। अगर विकास हुआ है तो बालोद के गांवों में किसान की आय में दिखाइए, युवाओं के हाथ में रोजगार दिखाइए, दुकानदार की बिक्री में दिखाइए और परिवार की बचत में दिखाइए।”
उन्होंने कहा कि आंकड़ों से सरकार की छवि चमकाई जा सकती है, लेकिन जनता की आर्थिक परेशानी छिपाई नहीं जा सकती। भाजपा सरकार को यह बताना होगा कि बढ़ती GDP और GSDP के बीच आम नागरिक की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी है। वरना सवाल उठता रहेगा—“ग्रोथ का ग्राफ ऊपर जा रहा है, लेकिन आम आदमी की जिंदगी नीचे क्यों महसूस हो रही है?”



