लोक संस्कृति की साधिका हर्षिता कोठारी का हुआ सम्मान
वनांचल के बच्चों के बीच कलेक्टर ने मनाया जन्मदिन

संपादक:- मीनू साहू
बालोद/डौंडीलोहारा। बालोद जिले की कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने अपना जन्मदिवस वनांचल ग्राम नंगुटोला (फिरतुटोला) की प्राथमिक शाला के नन्हे बच्चों के बीच मनाकर एक अलग मिसाल पेश की। कलेक्टर के विद्यालय पहुंचने पर बच्चों और शाला परिवार में उत्साह का माहौल रहा। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनका आत्मीय स्वागत किया।
इस अवसर पर स्कूली बच्चों को लोकगीत और लोकनृत्य के लिए तैयार करने वाली हर्षिता कोठारी को प्राथमिक शाला नंगुटोला की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के हाथों सम्मान मिलने पर हर्षिता ने इसे अपने लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और यादगार क्षण बताया।
हर्षिता कोठारी पिछले करीब 12 वर्षों से सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। छात्र जीवन से ही उन्होंने विद्यालयों के बच्चों को छत्तीसगढ़ी लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनका उद्देश्य बच्चों की प्रतिभा को मंच देने के साथ-साथ उन्हें अपनी मिट्टी और लोक परंपराओं से जोड़ना भी है।
वह छत्तीसगढ़ की लोक सांस्कृतिक संस्था लोक सिरजन डौंडीलोहारा से जुड़कर लोक गायिका एवं प्रशिक्षक के रूप में भी सक्रिय हैं। छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, ओडिशा और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर करीब 350 सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुकी हैं। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर लोककला के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ना उनकी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है।
हर्षिता कोठारी को संगीत की यह विरासत अपने परिवार से मिली है। उनके पिता विष्णु कोठारी ‘मीत’ छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गीतकार, गायक, संगीतकार और फिल्म गीतकार हैं। विष्णु कोठारी आज छत्तीसगढ़ के संगीत जगत में किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। लोक संस्कृति और छत्तीसगढ़ी संगीत के क्षेत्र में उनकी अलग पहचान है। हर्षिता उन्हें अपना प्रथम गुरु मानती हैं।
बचपन से पिता के सानिध्य में रहकर उन्होंने लोकगीत और संगीत की बारीकियां सीखीं। यही सीख आज वह ग्रामीण अंचल के बच्चों तक पहुंचा रही हैं। उनके प्रयास से अनेक विद्यार्थी मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत प्रस्तुत कर रहे हैं।
कलेक्टर के हाथों प्रशस्ति पत्र मिलने के बाद हर्षिता कोठारी ने शाला परिवार, ग्रामवासियों और कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ लोककला और उन बच्चों के प्रयासों का सम्मान भी है।
कलेक्टर का बच्चों के बीच जन्मदिवस मनाना और स्थानीय कलाकार को सम्मानित करना वनांचल क्षेत्र में सकारात्मक संदेश लेकर आया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि प्रतिभा शहरों की मोहताज नहीं होती, जरूरत केवल उसे पहचानने और प्रोत्साहित करने की होती है।



