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डौंडीलोहारा के मनीराम बने भ्रष्टाचार के पर्याय मौतों के भी जिम्मेदार! हर पोस्टिंग पर घोटाले

डौंडीलोहारा के मनीराम बने भ्रष्टाचार के पर्याय मौतों के भी जिम्मेदार! हर पोस्टिंग पर घोटाले

बालोद :- छत्तीसगढ़ बालोद जिला में बिजली विभाग में मनीराम नाम अब ईमानदारी का नहीं, बल्कि घोटालों का पर्याय बन चुका है। जहां-जहां यह अधिकारी पदस्थ रहा, वहां-वहां भ्रष्टाचार, लापरवाही और रिश्वतखोरी का ऐसा जाल बिछा कि आज भी उसकी गूंज लोगों की तकलीफों में सुनाई देती है। इस अफसर ने सेवा को कारोबार और जनता की तकदीर को खिलौना बना डाला।

गुंडरदेही में रहते हुए ट्रांसफॉर्मर आपूर्ति घोटाले का खुलासा हुआ था। पुराने ट्रांसफॉर्मरों को रिपेयर बताकर नए की तरह बिल पास किए गए। ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद किसी की सुनवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं को फाइलें लटकाकर परेशान किया गया, ताकि सच बाहर न आ सके।

लोहारा में पदस्थ रहते मनीराम पर लाइन विस्तार और मरम्मत के नाम पर लाखों की धांधली के आरोप लगे। बिना मापदंड, बिना तकनीकी स्वीकृति के ठेके पास हुए और विभागीय फंड को निजी जेबों में उड़ाया गया। गांवों में जहां बिजली की व्यवस्था सुधारने का दावा किया गया, वहां आज भी अंधेरा और टूटी लाइनें दिखाई देती हैं।

डौंडीलोहारा डिविजन में तो मनीराम की मनमानी ने हदें पार कर दीं। करंट हादसों में कई निर्दोष लोगों की मौतें हुईं, लेकिन विभाग ने किसी को दोषी नहीं ठहराया। बल्कि इस अफसर को संरक्षण देकर और शक्तियां दी गईं। ग्रामीणों के घर जल गए, खेतों में आग लगी, बच्चों की जानें गईं — पर मनीराम का सिंहासन जस का तस बना रहा।

अब हाल ये है कि विभाग के अंदर कर्मचारी भी खुलकर कहते हैं — “जहां मनीराम गया, वहां बेईमानी का राज गया।” उसके दफ्तरों में शिकायत से ज्यादा कमीशन की चर्चा होती है। काम तभी होता है जब चढ़ावा चढ़े। जो विरोध करता है, उसे ट्रांसफर या उत्पीड़न का तोहफा मिलता है।

सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद का कहना है

“मनीराम ने हर जगह जनता की सेवा नहीं, लूट का साम्राज्य खड़ा किया है। ये अफसर सिर्फ कुर्सी नहीं, पूरा सिस्टम चूस रहा है। जहां गया, वहां लोगों का खून पिया और विभाग को शर्मसार किया। अगर ऐसे अफसरों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जनता सड़कों पर उतरकर जवाब मांगेगी।”

डौंडीलोहारा से लेकर बालोद तक आज सवाल गूंज रहा है — कब तक ऐसे घोटालेबाज अफसर विभागीय सुरक्षा कवच में पलते रहेंगे? जनता अब जवाब चाहती है, क्योंकि अब ये मनीराम का विभाग नहीं, जनता की अदालत बन चुका है — जहां फैसला सच्चाई सुनाएगी और भ्रष्टाचार की दीवारें गिरेंगी!

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