शिक्षक से जनसंपर्क अधिकारी तक की प्रेरक यात्रा — चंद्रेश ठाकुर की बहुमुखी प्रतिभा ने गढ़ी नई पहचान

बालोद:- छत्तीसगढ़ में जब ज्ञान, वाणी और व्यवहार का संगम किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व में समाहित हो जाए, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। ऐसा ही नाम है चंद्रेश ठाकुर, जो वर्तमान में बालोद जिला जनसंपर्क अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। अपने जीवन की शुरुआत एक हिंदी व्याख्याता (वर्ग A) के रूप में करते हुए उन्होंने शिक्षा जगत से लेकर प्रशासनिक क्षेत्र तक अपनी अलग छाप छोड़ी है।पूर्व में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धमनसरा राजनांदगांव में हिंदी के व्याख्याता के रूप में पदस्थ रहते हुए उन्होंने न केवल विद्यार्थियों को भाषा और अभिव्यक्ति का गूढ़ ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें जीवन मूल्यों और सृजनशीलता का भी पाठ पढ़ाया। शिक्षक जीवन के दौरान वे विद्यालय और समाज दोनों में अपने मधुर स्वभाव और उत्कृष्ट शिक्षण शैली के कारण सम्मानित रहे।चंद्रेश ठाकुर न केवल एक शिक्षक या अधिकारी हैं, बल्कि कुशल उद्घोषक और प्रभावशाली वक्ता के रूप में भी उनकी पहचान बनी है। विभिन्न शासकीय आयोजनों में उनकी ओजस्वी आवाज़ और संयमित वाणी ने कई मंचों को जीवंत कर दिया। उनकी शब्द-शक्ति और संवाद-कौशल ने प्रशासन और आमजन के बीच मजबूत संबंध स्थापित किया है।हाल ही में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में उन्होंने अपनी संवेदनशीलता और कला-प्रेम को भी अभिव्यक्त किया। उन्होंने मंच पर उपस्थित रहकर शिक्षक म्यूजिकल ग्रुप की मनमोहक प्रस्तुति की सराहना की और पूरे समूह को प्रशासन की ओर से सम्मानित किया। इस कदम से उन्होंने यह संदेश दिया कि प्रतिभा चाहे शिक्षा जगत में हो या संगीत के क्षेत्र में — उसका सम्मान ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।आज चंद्रेश ठाकुर न केवल एक अधिकारी हैं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और समाज के सेतु के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका व्यक्तित्व सौम्यता, निष्ठा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। एक शिक्षक के संस्कार, एक वक्ता की अभिव्यक्ति और एक जनसेवक की जिम्मेदारी — इन तीनों का सुंदर संगम उन्हें बालोद जिले का गौरव बनाता है।उनकी यात्रा यह सिखाती है कि सच्चा कर्मठ व्यक्ति हर पद पर रहकर समाज की सेवा कर सकता है — चाहे वह कक्षा का मंच हो या प्रशासन का। चंद्रेश ठाकुर आज बालोद जिले में समर्पण, नेतृत्व और जनसंपर्क की मिसाल बन चुके हैं।



