बालोद के अधिकारी मौन माफिया मैदान में प्रशासनिक ढिलाई और खनिज लूट का गठजोड़

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में शासन-प्रशासन की लापरवाही किस हद तक पहुँच चुकी है, इसका ताज़ा उदाहरण ग्राम राणा खुज्जी और उसके आसपास का क्षेत्र दे रहा है, जहाँ खनिजों की खुली लूट जारी है और जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में सोया प्रतीत होता है। जानकारी सामने आने पर ऐसा लगता है कि जिले में कानून से ज़्यादा माफियाओं का दबदबा है और सरकारी तंत्र उनकी गतिविधियों पर पर्दा डालने में व्यस्त है।इस पूरे प्रकरण को सामने लाने का काम प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद ने किया। क्लब के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद के अनुसार खनिज विभाग की उदासीनता इतनी बढ़ चुकी है कि जिले में अवैध उत्खनन आम बात हो गई है। मोहन निषाद ने तंज कसते हुए कहा कि “विधानसभा के जवाबों की व्यस्तता में अधिकारी इतने उलझे हैं कि जिले में हो रही खनन लूट दिखाई ही नहीं देती।”ग्राम मड़वा पथरा ग्राम पंचायत राणा खुज्जी, तहसील मार्री बंगला क्षेत्र में निजी भूमि खसरा क्रमांक 560/2, 560/3 और 561/2 में कुल 0.83 हेक्टेयर भूमि पर मुरूम निकाले जाने की पुष्टि हुई है। हैरानी की बात तो यह है कि जो दस्तावेज़ अनुमति हेतु दिखाए जा रहे हैं, उत्खनन उनसे बिल्कुल विपरीत स्थान पर जारी है। यह वही दस्तावेज़ हैं जो स्वयं खनन में लगे लोगों द्वारा दिखाए गए, जिससे साफ है कि यह पूरा खेल जालसाजी और मिलीभगत का है।जिले की खनिज अधिकारी मीनाक्षी साहू पर ग्रामीणों की तीखी टिप्पणियाँ सामने आई हैं। ग्रामीणों के अनुसार मैडम “जमीन के काम” से ज्यादा “दिखावटी मंचों” पर सक्रिय दिखाई देती हैं। खनिज चोरी रोकने की दिशा में उनका रवैया इतना सुस्त है कि लोग मज़ाक में कहने लगे हैं कि “जिले में मुरूम निकालने वाले मशीनें बदलती हैं, पर खनिज विभाग का जवाब नहीं।” जब प्रेस रिपोर्टर क्लब ने रायपुर स्थित उच्च अधिकारियों को फोन कर मामले की जानकारी दी, तब जाकर दबाव में खनिज अधिकारी लगभग चार घंटे बाद मौके पर पहुँचीं। यह देरी प्रशासन की गंभीर अक्षमता को उजागर करती है।अब सोचने वाली बात यह है कि मीडिया के हस्तक्षेप के बाद भी अधिकारी इतनी धीमी गति से पहुँचें, तो आम जनता की शिकायतों का क्या हश्र होता होगा? ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक अधिकारी वास्तविकता देखने जमीन पर नहीं उतरेंगे, तब तक बालोद जिले की खनिज संपदा माफियाओं के हाथों में लुटती रहेगी।सूत्रों की मानें तो राजनांदगांव का एक कुख्यात खनिज कारोबारी महीनों से बालोद जिले के अलग-अलग इलाकों में अवैध मुरूम उत्खनन का संचालन कर रहा है। कहा जाता है कि यह माफिया बिना रॉयल्टी, बिना किसी वैध दस्तावेज़ और बिना रोक-टोक के भारी वाहनों में मुरूम भरकर ले जाता है। उसकी संपत्ति की तेज़ी से बढ़ती मात्रा इसी लूट का परिणाम है। राणा खुज्जी इसका सबसे ताज़ा और खुला उदाहरण है, जहाँ खुलेआम खनन जारी था और विभाग पूरी तरह अनजान बना रहा।रायपुर में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों ने जब खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश दिए, तब जाकर एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारी अनमने ढंग से मौके पर पहुँचे। उनकी पूरी कार्रवाई को ग्रामीणों ने “औपचारिक खानापूर्ति” बताया। वास्तविकता यही है कि बालोद जिले का खनिज विभाग आज बेबस नहीं, बल्कि बेपरवाह हो चुका है। जिस विभाग को खनन नियंत्रण की ज़िम्मेदारी मिली है, उसी के संरक्षण में माफिया ताकतवर होते दिख रहे हैं।जिले में भ्रष्टाचार की स्थिति इस कदर बढ़ चुकी है कि खनिज माफियाओं से हर महीने मोटी रकम के “पैकेज” लेने की चर्चाएँ चारों ओर फैल चुकी हैं। इस कारण विभागीय अधिकारियों का रुख लापरवाही से आगे बढ़कर अब पूरी तरह समझौते वाला बन गया है। स्थानीय लोग खुले शब्दों में कह रहे हैं कि “बालोद में आज खनिज से ज्यादा खामोशी की खुदाई हो रही है, और अधिकारियों की चुप्पी ही माफियाओं की सबसे बड़ी ताकत है।”जिला प्रशासन की उदासीनता ने बालोद को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहाँ शासन की विश्वसनीयता दांव पर लगी है। अगर खनिज विभाग के अधिकारी और प्रशासन तुरंत कठोर कदम नहीं उठाते, तो आने वाले दिनों में जिले की प्राकृतिक संपदा पूरी तरह माफियाओं के हाथों नष्ट हो जाएगी। यह न सिर्फ सरकारी राजस्व का नुकसान है, बल्कि ग्रामीणों की जमीन, पर्यावरण और भविष्य सब कुछ दांव पर लगा हुआ है।ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने एक स्वर में चेतावनी दी है—“अगर प्रशासन ने अब भी आंखें नहीं खोलीं, तो बालोद जिला खनिज लूट का मुख्य अड्डा बनकर रह जाएगा।”



