हमर छत्तीसगढ़

बालोद में हल्लाबोल, सरकार ने दिया संवाद का भरोसा शिक्षकों ने याद दिलाया मोदी की गारंटी

 

बालोद :- चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों की याद दिलाने और लंबित मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के आह्वान पर सोमवार को जिला मुख्यालय बालोद में ऐतिहासिक हल्लाबोल प्रदर्शन देखने को मिला। बस स्टैंड परिसर में जिले के पांचों विकासखंडों से हजारों की संख्या में सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता और प्राचार्य एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह धरना सरकार को चेताने के लिए एक दिवसीय है, लेकिन यदि अब भी मांगों पर ठोस और त्वरित निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने अपने संकल्प पत्र में शिक्षकों से जो वादे किए थे, अब उन्हें पूरा करने का समय आ गया है। वेतन विसंगति, क्रमोन्नत वेतनमान, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना, टीईटी की अनिवार्यता और वीएसके एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति जैसे मुद्दों पर शिक्षक समुदाय में गहरा असंतोष है।सेजेस प्राचार्य नीलम कौर ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति से नहीं डरते, लेकिन शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। “हम वह शिक्षक हैं जो घंटी बजाकर स्कूल शुरू करते हैं और घंटी बजाकर छुट्टी करते हैं। सरकार को चाहिए कि शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य के लिए ही समर्पित रखा जाए,” उन्होंने कहा।फेडरेशन के जिलाध्यक्ष एलेन्द्र यादव ने कहा कि सरकार द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति आज तक दूर नहीं हो पाई है, जबकि 100 दिनों में समाधान का वादा किया गया था। उन्होंने टीईटी को सेवा में रहते हुए अनिवार्य बनाए रखने और वीएसके एप को निजी मोबाइल पर लागू करने को अव्यवहारिक बताया।प्रदेश उपाध्यक्ष देवेन्द्र हरमुख ने चार प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए कहा कि वेतन विसंगति दूर करना, सभी को क्रमोन्नत वेतनमान देना, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना और टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करना शिक्षक समुदाय की न्यायसंगत मांगें हैं। उन्होंने साइबर फ्रॉड के बढ़ते  मामलों का हवाला देते हुए निजी मोबाइल पर अनिवार्य एप को लेकर भी आपत्ति जताई।सरकार का पक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि सरकार शिक्षकों की मांगों के प्रति संवेदनशील है। वेतन विसंगति और सेवा गणना जैसे विषय वित्त विभाग और विधि विभाग से जुड़े होने के कारण प्रक्रिया में समय लग रहा है। सरकार का पक्ष है कि टीईटी और ऑनलाइन उपस्थिति जैसे प्रावधान शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लागू किए गए हैं, हालांकि व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए सुझावों पर विचार किया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि शिक्षक संगठनों से शीघ्र संवाद स्थापित कर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।धरना-प्रदर्शन में जिले व प्रदेश के अनेक पदाधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं और प्राचार्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शिक्षकों की एकजुटता और आक्रोश ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अब भी ठोस पहल नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज होगा।

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