हमर छत्तीसगढ़

बालोद में ट्रैफिक पर पुलिस का करारा प्रहार डेढ़ महीने में नशे में ड्राइविंग करने वालों पर भारी जुर्माना, सड़कों पर दिखी सख्ती की असरदार तस्वीर

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर चलाया गया विशेष अभियान अब कठोर परिणाम देने लगा है। आमजन की जान बचाने और बेलगाम ट्रैफिक अव्यवस्था पर लगाम कसने के लिए बालोद पुलिस ने बीते लगभग डेढ़ महीने में नियम तोड़ने वालों पर जोरदार कार्रवाई की है।जिले के पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल की रणनीतिक निगरानी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर के समन्वय में चलाए गए अभियान ने सड़क अनुशासन को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।अनुविभागीय पुलिस अधिकारी बोनीफॉस एक्का तथा यातायात प्रभारी रविकांत पांडे की अगुवाई में पूरे जिले में ताबड़तोड़ चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान नियम तोड़ने वालों को सिर्फ रोका नहीं गया, बल्कि दंडित भी किया गया और लोगों को सड़क अनुशासन के प्रति जागरूक करने की पहल भी तेज की गई।अभियान के दौरान कुल 2569 वाहन चालकों पर शिकंजा कसते हुए 15 लाख 67 हजार 400 रुपये की समन राशि वसूली गई। सबसे बड़ी कार्रवाई नशे में वाहन चलाने वालों पर हुई, जहां 94 चालकों को पकड़कर अदालत में पेश किया गया। न्यायालय ने इन मामलों में कुल 9 लाख 68 हजार रुपये का जुर्माना ठोका, जिसने सड़क पर कानून की ताकत साफ दिखा दी।दोपहिया चालकों की लापरवाही पर भी कड़ा रुख अपनाया गया। हेलमेट न पहनकर चलने वाले 151 लोगों पर कार्रवाई करते हुए 80 हजार रुपये का दंड लगाया गया। पुलिस ने साफ किया है कि शराब पीकर वाहन चलाना महज गलती नहीं बल्कि गंभीर अपराध है — पहली बार पकड़े जाने पर भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान, जबकि दोबारा पकड़े जाने पर और कड़ी सजा तय है।सिर्फ जुर्माना ही नहीं, बल्कि लाइसेंस पर भी वार शुरू किया गया है। पहली बार पकड़े गए चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किया जा रहा है, जबकि दोबारा अपराध करने वालों का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया चालू है।यातायात प्रभारी के पदभार ग्रहण करने के बाद जिले में दुर्घटनाओं में गिरावट दर्ज की जा रही है। लगातार चेकिंग, रात्रि गश्त, चौक-चौराहों पर निगरानी और जागरूकता मुहिम ने वाहन चालकों को सावधान किया है।
पुलिस ने जनता से साफ अपील की है — नशे में ड्राइविंग न करें, हेलमेट और सीट बेल्ट अनिवार्य रूप से लगाएं, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन न चलाएं, नाबालिगों को गाड़ी न सौंपें और मालवाहक वाहनों में यात्रियों को न बैठाएं।जिले की पुलिस ने संकेत दे दिया है कि यह अभियान कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा की निर्णायक लड़ाई है — और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ यह कार्रवाई आगे भी और तेज होगी।यदि चाहें तो मैं इसका और ज्यादा आक्रामक, अखबारी फ्रंट-पेज स्टाइल संस्करण भी बना सकता हूँ।

Related Articles

Back to top button