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रोजगार का रणभेरी PMFME योजना से बदलती किस्मत, गांव-गांव उठेगा उद्योग का तूफान

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र अब सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहा — यह रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सम्मान की लड़ाई का नया मैदान बन चुका है। इसी मैदान में युवाओं, महिलाओं और छोटे उद्यमियों को हथियार देने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन (PMFME) योजना एक निर्णायक हस्तक्षेप के रूप में उभरी है। यह योजना सिर्फ सहायता नहीं, बल्कि बेरोजगारी पर सीधा प्रहार है। इसी उद्देश्य को पूरा कर रहा है जिला मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बघमरा की महिलाओं ने।

आज ग्रामीण भारत की सबसे बड़ी समस्या है — मेहनत है, कौशल है, पर अवसर नहीं। किसान उपज बेचकर घाटे में, महिलाएं हुनर के बावजूद घरों में कैद, और युवा रोजगार के लिए शहरों में भटकते हुए। PMFME योजना इस ठहराव को तोड़ने की ठोस रणनीति है। यह योजना स्पष्ट संदेश देती है कि अब रोजगार मांगने का नहीं, खड़ा करने का समय है।

योजना के तहत सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी दी जा रही है, जो अधिकतम 10 लाख रुपये तक पहुंचती है। यह सिर्फ वित्तीय मदद नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भरोसे की ढाल है जो पूंजी के अभाव में अपने सपनों को दबा देते हैं। अचार, मसाला, तेल, बेकरी, डेयरी, जूस, रेडी-टू-ईट उत्पाद जैसे 60 से अधिक उद्योगों को इसमें शामिल किया गया है, यानी हर जिले, हर गांव, हर परिवार के पास अवसर मौजूद है।

इस योजना की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह केवल ऋण नहीं देती, बल्कि व्यवसाय खड़ा करने का पूरा तंत्र तैयार करती है। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार तक पहुंच — ये सब उस सोच का हिस्सा हैं जो छोटे कारीगर को स्थानीय विक्रेता से राष्ट्रीय ब्रांड में बदल सकती है। जिला स्तर पर संसाधन व्यक्ति DPR तैयार करवाने से लेकर बैंक ऋण स्वीकृति तक सहयोग करते हैं, जिससे नौसिखिया भी आत्मविश्वास के साथ उद्योग शुरू कर सके।

आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है, आयु 18 वर्ष से अधिक होना आवश्यक है, और सामान्य दस्तावेजों के साथ आवेदन किया जा सकता है। यानी बहाने खत्म — अब जो आगे बढ़ना चाहता है, उसके लिए रास्ता खुला है।

सामाजिक दृष्टि से देखें तो यह योजना सिर्फ उद्योग नहीं बढ़ा रही, बल्कि पलायन रोकने, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन रही है। यदि समाज, प्रशासन और युवा मिलकर इसे आंदोलन बना दें, तो हर ब्लॉक में प्रसंस्करण इकाइयां खड़ी होंगी, हर गांव में रोजगार जन्म लेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था नई ताकत से खड़ी होगी।

सच यही है — PMFME योजना कागज की नीति नहीं, बदलाव की चेतावनी है। जो लोग अवसर पहचान लेंगे, वही आने वाले समय में रोजगार देने वाले बनेंगे। बाकी लोग सिर्फ शिकायत करते रह जाएंगे।

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