मनरेगा से बदलती तस्वीर पिकरी पार का नया तालाब बना विकास का मजबूत आधार

रिपोर्टर:- रिखी साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला अंतर्गत गुरूर विकासखंड के ग्राम पंचायत पिकरी पार में इन दिनों विकास की एक सशक्त मिसाल तैयार हो रही है। मनरेगा योजना के तहत नया तालाब के गहरीकरण का कार्य केवल एक निर्माण गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन, रोजगार सृजन और जल संरक्षण की दिशा में उठाया गया निर्णायक कदम बन गया है।
करीब 8 लाख रुपये की लागत से चल रहा यह मजदूरी आधारित कार्य गांव की आर्थिक धड़कन को तेज कर रहा है। इस पहल से स्थानीय श्रमिकों को गांव में ही काम मिल रहा है, जिससे पलायन पर रोक लगने के साथ परिवारों की आय में स्थिरता आ रही है। खेतों में मेहनत करने वाले हाथ अब अपने ही गांव के भविष्य को संवारने में लगे हैं, यही इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है।
नया तालाब का गहरीकरण केवल मिट्टी हटाने का काम नहीं है, बल्कि यह आने वाले वर्षों के जल संकट से लड़ने की तैयारी है। तालाब की क्षमता बढ़ने से वर्षा जल का संचयन बेहतर होगा, भूजल स्तर सुधरेगा, सिंचाई सुविधाएं मजबूत होंगी और पशुधन को भी पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ने की संभावना है, जो सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी।इस कार्य की खास बात यह है कि पंचायत स्तर पर व्यवस्थाओं को व्यवस्थित, पारदर्शी और श्रमिक हितैषी ढंग से संचालित किया जा रहा है। श्रमिकों की उपस्थिति, मजदूरी भुगतान, कार्यस्थल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह दर्शाता है कि जब स्थानीय प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीण एक साथ लक्ष्य तय कर लेते हैं, तो योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर असर दिखाने लगती हैं।
ग्राम पंचायत पिकरी पार में चल रहा यह कार्य ग्रामीण विकास की उस सोच को मजबूत करता है, जिसमें संसाधनों का उपयोग केवल निर्माण के लिए नहीं, बल्कि स्थायी परिवर्तन के लिए किया जाता है। यह पहल बताती है कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनमें जनभागीदारी, जिम्मेदारी और दूरदर्शिता शामिल हो।
आज नया तालाब का गहरीकरण गांव के लिए सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनता जा रहा है। यह कार्य आने वाले समय में खेती, जल प्रबंधन और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करेगा।अगर इसी तरह योजनाओं का क्रियान्वयन ईमानदारी और उत्साह से होता रहा, तो पिकरी पार जैसे गांव न केवल आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत भी साबित होंगे।
ग्राम पंचायत पिकरी पार की सरपंच-पंच शीला साहू ने नया तालाब गहरीकरण कार्य को गांव के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि मनरेगा के माध्यम से चल रहा यह कार्य केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण, खेती सुधार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस प्रयास है।उन्होंने कहा कि पंचायत का प्रयास है कि योजना का प्रत्येक लाभ पात्र ग्रामीणों तक पहुंचे और कार्य पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता तथा समयबद्ध तरीके से पूरा हो। श्रमिकों को समय पर मजदूरी मिले, कार्यस्थल पर सुविधाएं उपलब्ध रहें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो—इस पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।साहू ने आगे कहा कि तालाब गहरीकरण से गांव में वर्षाजल का बेहतर संचयन होगा, जिससे किसानों को सिंचाई में राहत मिलेगी और आने वाले वर्षों में जल संकट की स्थिति कम होगी। उन्होंने इसे “गांव की जीवनरेखा मजबूत करने वाला काम” बताते हुए कहा कि पंचायत की प्राथमिकता विकास को जमीन पर उतारना है, केवल कागजों में दिखाना नहीं।उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग इस कार्य को अपना समझकर सहयोग करें, ताकि पिकरी पार जल संरक्षण और श्रम आधारित विकास की मिसाल बन सके।



