दुर्ग जिले में अवैध ईंट भट्ठों का काला कारोबार वृक्ष कट रहे, कानून सो रहा!

रिपोर्ट:- गोपाल निर्मलकर
दुर्ग:– छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के गांव–गांव में इन दिनों एक खतरनाक और गैरकानूनी गतिविधि तेजी से फैलती दिखाई दे रही है। बिना किसी वैधानिक अनुमति के अवैध ईंट भट्ठे धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई स्थानों पर खुलेआम ईंट निर्माण का कार्य चल रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती। यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि पर्यावरण और कानून दोनों के साथ खुली चुनौती है।
ईंट बनाने के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए गांवों के आसपास के पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है। हरे-भरे पेड़ों को रातोंरात धराशायी कर दिया जाता है और उन्हीं लकड़ियों को भट्ठों में झोंक दिया जाता है। जंगलों और खेत किनारे खड़े वृक्षों का यह लगातार हो रहा सफाया आने वाले समय में पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन भट्ठों के संचालकों के पास न तो पर्यावरण विभाग की स्वीकृति है, न ही खनिज विभाग या पंचायत से कोई वैध अनुमति। बावजूद इसके, ईंट निर्माण का यह अवैध कारोबार बिना किसी भय के जारी है। सवाल उठता है कि आखिर प्रशासन की निगाहें इस पर क्यों नहीं पड़ रही हैं? क्या जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी नहीं, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं?
कानून स्पष्ट कहता है कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार का भट्ठा संचालन गैरकानूनी है। इसके लिए पर्यावरणीय स्वीकृति, भूमि उपयोग की अनुमति और कई तरह की प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। लेकिन दुर्ग जिले के कई गांवों में यह नियम कागजों तक ही सीमित रह गया है। जमीन पर तो मानो कानून का कोई अस्तित्व ही नहीं।
इस अवैध गतिविधि का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। धुएं और प्रदूषण से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। खेतों की उर्वरता पर असर पड़ रहा है, और हवा में घुलता धुआं ग्रामीणों की जिंदगी को धीरे-धीरे बीमार बना रहा है। फिर भी जिम्मेदार तंत्र की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
अब समय आ गया है कि शासन और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले। यदि तुरंत सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जंगलों का और बड़ा नुकसान होगा और अवैध कारोबारियों के हौसले और बुलंद हो जाएंगे। कानून का राज तभी स्थापित होगा जब नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो और अवैध ईंट भट्ठों के इस पूरे नेटवर्क पर सर्जिकल प्रहार किया जाए।
दुर्ग जिले के गांवों में चल रहा यह अवैध खेल केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रकृति, कानून और आम जनता के अधिकारों के साथ किया जा रहा खुला अन्याय है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा।



