खेत का जल्लाद बेनकाब अवैध लकड़ी माफिया कोसागोंदी निवासी गोलू पर आखिर कसा शिकंजा

संपादक:- मीनू साहू
रिपोर्टर:- उत्तम साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक में वर्षों से चल रही हरियाली की निर्मम हत्या पर आखिरकार विराम लगने लगा है। ग्राम कोसागोदी का रहने वाला थानेश्वर उर्फ गोलू, पिता रोहित धोबी, जो लंबे समय से ग्रामीण इलाकों और खेतों में खड़े पेड़ों को कटवाकर अवैध लकड़ी के कारोबार को बढ़ावा दे रहा था, अब लोगों के गुस्से और जागरूकता के सामने टिक नहीं पाया। यह कोई छोटा-मोटा अपराध नहीं था, बल्कि एक संगठित लकड़ी माफिया की तरह वह क्षेत्र की हरियाली को लगातार निगल रहा था।
गोलू जैसे लोग केवल पेड़ नहीं काटते, बल्कि पूरे पर्यावरण और भविष्य को बर्बाद करते हैं। खेतों में खड़े उपयोगी पेड़ों को जबरन कटवाना, ग्रामीणों को दबाव में लेना और अवैध तरीके से लकड़ी का कारोबार करना उसकी आदत बन चुकी थी। प्रशासन की ढिलाई ने उसे इतना बेखौफ बना दिया था कि वह खुलेआम नियमों को ठेंगा दिखाता रहा। यह साफ संकेत है कि यदि समय रहते कार्रवाई न हो, तो ऐसे लकड़ी माफिया पूरे इलाके को बंजर बना सकते हैं।
ग्राम पलारी में हुई हालिया कार्रवाई केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी या रोक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस पूरे अवैध नेटवर्क के खिलाफ चेतावनी है जो वर्षों से सक्रिय था। ग्रामीणों ने जिस तरह एकजुट होकर विरोध किया, उसने साबित कर दिया कि जब जनता ठान ले, तो सबसे ताकतवर माफिया भी ज्यादा दिन नहीं टिक सकता। यह घटना इस बात का भी सबूत है कि असली बदलाव नीचे से शुरू होता है, न कि सिर्फ कागजों में चलने वाले अभियानों से।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गोलू अकेला नहीं था—उसके पीछे और कौन लोग हैं? किनके संरक्षण में यह अवैध लकड़ी का खेल चलता रहा? केवल एक व्यक्ति पर कार्रवाई कर देना काफी नहीं होगा। जरूरत है पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की, ताकि भविष्य में कोई और इस रास्ते पर चलने की हिम्मत न कर सके।
प्रशासन को अब दिखावटी कार्रवाई से आगे बढ़कर लगातार निगरानी, सख्त कानून और त्वरित सजा सुनिश्चित करनी होगी। वरना आज एक लकड़ी माफिया पकड़ा गया है, कल दूसरा खड़ा हो जाएगा। अगर अब भी सख्ती नहीं दिखाई गई, तो जंगलों का यह कत्ल यूं ही जारी रहेगा और आने वाली पीढ़ियां सिर्फ सूखी जमीन और खोखले वादों के साथ रह जाएंगी।



