हमर छत्तीसगढ़

“शिक्षा में डूबता बालोद टॉप से फ्लॉप तक का शर्मनाक सफर”

 

संपादक :- मीनू साहू

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिला आज शिक्षा के नाम पर एक ऐसे संकट से गुजर रहा है, जिसे सिर्फ “खराब परिणाम” कह देना सच्चाई से भागना होगा। आरटीआई कार्यकर्ता यशवंत निषाद ने कहा कि यह सीधे-सीधे प्रशासनिक विफलता, लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर निष्क्रियता का परिणाम है। 10वीं और 12वीं बोर्ड के हालिया नतीजों ने जिले की असलियत को बेनकाब कर दिया है—ना कोई छात्र टॉप-10 में, ना कोई उपलब्धि, सिर्फ गिरता स्तर और बढ़ती असफलता।आंकड़े खुद चीख-चीख कर बता रहे हैं कि सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। 10वीं में 10,426 छात्रों में से 2,520 फेल हो जाना कोई छोटी बात नहीं है। वहीं 12वीं में भी 819 छात्रों का असफल होना यह साबित करता है कि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ टूट चुकी है। सवाल यह है कि आखिर इन छात्रों की नाकामी का जिम्मेदार कौन है? क्या ये बच्चे अचानक कमजोर हो गए, या फिर उन्हें सही मार्गदर्शन देने वाला सिस्टम ही सो गया?जिला शिक्षा विभाग की भूमिका इस पूरे मामले में सबसे संदिग्ध और शर्मनाक नजर आती है। जब पूरे साल पढ़ाई की निगरानी करनी थी, तब अधिकारी कार्यक्रमों, मीटिंगों और दिखावटी आयोजनों में व्यस्त रहे। जब परीक्षा सिर पर थी, तब भी जिम्मेदारी निभाने के बजाय खानापूर्ति की जाती रही। क्या यही है प्रशासन की कार्यशैली—कुर्सी पर बैठो, वेतन लो और नतीजे आने पर चुप्पी साध लो?डीईओ और जिला प्रशसन  से सीधा सवाल है—क्या अब भी आप जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं, या फिर बहानों की आड़ में इस असफलता को छुपाने की कोशिश करेंगे? यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, यह हजारों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। जिन बच्चों ने मेहनत की, उन्हें सिस्टम ने धोखा दिया।बालोद, जो कभी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी माना जाता था, आज फेलियर जिला घोषित होने के कगार पर खड़ा है। अगर अभी भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है।अब वक्त आ गया है कि सिर्फ मीटिंग और भाषण नहीं, बल्कि कठोर कार्रवाई हो। लापरवाह अधिकारियों को हटाया जाए, जवाबदेही तय की जाए और शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। वरना बालोद का नाम सिर्फ असफलता की मिसाल बनकर रह जाएगा।

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