बालोद में ‘आप’ का तीखा हमला पत्रकारों के दमन और प्रशासनिक हठधर्मिता ने उजाड़ा छात्रों का भविष्य

संपादक:- मीनू साहू
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता दीपक आरदे ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब जिले के ईमानदार और निष्पक्ष पत्रकार शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर कर रहे थे, तब शासन और प्रशासन सुधार करने के बजाय उनकी आवाज दबाने में लगा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों पर झूठे और गंभीर आरोप लगाकर उनकी आवाज को कुचलने का प्रयास किया गया, ताकि सच्चाई सामने न आ सके। आज जो स्थिति बनी है, वह उसी दमनकारी रवैये का परिणाम है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि समय रहते शिक्षकों की कमी, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव और विभागीय लापरवाही पर ध्यान दिया जाता, तो आज यह दिन देखने को नहीं मिलता। अब जब परिणाम सामने आ गए हैं, तो अधिकारी केवल औपचारिक समीक्षा की बात कर रहे हैं, लेकिन इससे उन छात्रों का नुकसान नहीं भर सकता जिन्होंने अपना एक साल खो दिया।माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणामों ने बालोद जिले की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। इस बार जिले का एक भी छात्र प्रावीण्य सूची (टॉप-10) में स्थान नहीं बना पाया, जो न केवल शैक्षणिक गिरावट का संकेत है बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता को भी दर्शाता है। लगातार गिरते परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर केवल आंकड़ों का खेल खेला जा रहा था, जबकि जमीनी स्तर पर सुधार के कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए।
आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयुक्त सचिव दीपक आरदे ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “शैक्षणिक आपातकाल” करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिले में 10वीं के 2520 और 12वीं के 819 विद्यार्थियों का अनुत्तीर्ण होना बेहद चिंताजनक है और यह शिक्षा विभाग की लापरवाही का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उनके अनुसार यह केवल संख्या नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीदों के टूटने की कहानी है।
आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाया जाए। साथ ही, पत्रकारों के खिलाफ की जा रही प्रतिशोधात्मक कार्रवाई को तुरंत बंद करने की भी मांग की गई है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।



