हमर छत्तीसगढ़

दस दिवसीय नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का भव्य समापन, लाटाबोड़ बना संस्कार और राष्ट्रभक्ति का केंद्र

संपादक:- मीनू साहू

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के लाटाबोड़ स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित दस दिवसीय “नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग 2026” का आज भव्य और उत्साहपूर्ण समापन हुआ। पूरे आयोजन में राष्ट्रभाव, संस्कार, अनुशासन और भारतीय शिक्षा पद्धति की झलक देखने को मिली। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छाया विधायक राकेश यादव मौजूद रहे। उनके साथ योगाचार्य रवि पांडे, पालक ठाकुर, पूर्व मंडल अध्यक्ष तेज प्रकाश मंडावी तथा ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षार्थियों द्वारा खेल, योग, समूह गतिविधियां, गीत, व्यायाम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का शानदार प्रदर्शन किया गया। पूरे परिसर में ऊर्जा, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का वातावरण देखने को मिला। मंच से वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा आधार है और आचार्य ही समाज की दिशा तय करते हैं।

विद्या भारती, भारतीय शिक्षा संस्थान एवं सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति के मार्गदर्शन तथा जिला ग्राम भारती बालोद के तत्वावधान में आयोजित यह प्रशिक्षण वर्ग 27 अप्रैल से प्रारंभ होकर 10 मई तक चला। इस वर्ग में बालोद जिले के पांच विकासखंडों के 28 विद्यालयों से 65 प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया, जिनमें 8 पुरुष आचार्य एवं 57 महिला शिक्षार्थियां शामिल रहीं। प्रशिक्षण के दौरान 5 पुरुष एवं 2 महिला प्रशिक्षकों सहित जिला समन्वयक का सतत मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

इस प्रशिक्षण वर्ग को संगठन मंत्री ओम देवनारायण साहू, प्रांत प्रमुख संतोष निषाद, सहप्रांत प्रमुख फिला राम साहू, प्रांतीय अध्यक्ष रत्न चक्रधर, जिला ग्राम भारती अध्यक्ष आगेश्वर साहू, सचिव नरेंद्र साहू, सदस्य भोजराम साहू, सुगल किशोर साहू तथा पूर्व प्रांतीय सचिव सियाराम सार्वा का विशेष मार्गदर्शन मिला।

कार्यक्रम को सफल बनाने में कुंवारीमाता शिक्षण समिति, ग्राम पंचायत लाटाबोड़, नवयुवक मंडल, ग्राम विकास समिति, सरपंच, उपसरपंच, वार्ड पंचों और ग्रामीणों का उल्लेखनीय योगदान रहा। समापन अवसर पर सभी अतिथियों और प्रशिक्षार्थियों का सम्मान किया गया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।लाटाबोड़ की धरती पर दस दिनों तक चला यह प्रशिक्षण वर्ग केवल शिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कार, संगठन और राष्ट्र चेतना का जीवंत महायज्ञ साबित हुआ।

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