हमर छत्तीसगढ़

राजनांदगांव का ‘माडी धाम’ बना संस्कार और शिक्षा का केंद्र

बच्चों को मिल रही सेवा, संस्कृति और नैतिक शिक्षा की अनूठी सीख

संपादक :- मीनू साहू 

राजनांदगांव:- छत्तीसगढ़ के संस्कारधानी नगरी राजनांदगांव में स्थित माडी धाम आज बच्चों के सर्वांगीण विकास का एक प्रेरणादायक केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां बच्चों को केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें सेवा भावना, अनुशासन, व्यवहारिक ज्ञान और सनातन संस्कृति के मूल्यों से भी जोड़ा जा रहा है। आधुनिक दौर में जहां अधिकतर बच्चे मोबाइल और आभासी दुनिया में खोते जा रहे हैं, वहीं माडी धाम उन्हें सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रहा है।माडी धाम में शहर और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले बच्चे नियमित रूप से पहुंचकर शिक्षा के साथ-साथ नैतिक संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारियों की सीख ले रहे हैं। यहां बच्चों को धर्म, संस्कृति और मानवता से जोड़ने के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाती हैं। यही कारण है कि यहां से जुड़े बच्चे पढ़ाई के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ-साथ संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक के रूप में भी विकसित हो रहे हैं।
इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। बच्चे अपनी स्वेच्छा से यहां आकर शिक्षा और संस्कार ग्रहण करते हैं। बच्चों को बड़ों का सम्मान करना, समाज सेवा, सहयोग की भावना, अनुशासन और भारतीय संस्कृति का महत्व समझाया जाता है। साथ ही यह भी सिखाया जाता है कि जीवन में सफलता केवल अंकों से नहीं बल्कि अच्छे संस्कारों और व्यवहार से भी मिलती है।
माडी धाम में नियमित रूप से भजन, पूजा-पाठ, योग, नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव उनकी पढ़ाई में भी देखने को मिल रहा है। कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में यहां के विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सतीश साहू ने 10वीं में 91.6 प्रतिशत, त्रिवेणी साहू ने 12वीं में 73.8 प्रतिशत, श्लोक सोनी ने 10वीं में 73.5 प्रतिशत, दक्षा भुजड़े ने आठवीं में 73.5 प्रतिशत, दुष्यंत कुमार साहू ने 10वीं में 67.33 प्रतिशत तथा त्रिवेणी निषाद ने 12वीं में 62 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।माडी धाम से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में बच्चों को सही मार्गदर्शन और संस्कार देने की सबसे अधिक आवश्यकता है। यदि बचपन से ही उनमें सेवा, अनुशासन और संस्कृति के बीज बोए जाएं तो वे भविष्य में समाज और राष्ट्र के आदर्श नागरिक बन सकते हैं। माडी धाम का यह प्रयास आज समाज के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

Related Articles

Back to top button