हमर छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में बढ़ता असंतोष बिजली दरों से लेकर मुआवज़े तक, जनता पर बोझ:-चंद्रकांत कोरे

बालोद :- छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बिजली दरों में हालिया वृद्धि, भारत माला परियोजना में किसानों को अपर्याप्त मुआवज़ा, और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक मुद्दों ने आम जनमानस में असंतोष को हवा दी है। आलोचकों का आरोप है कि सरकार की नीतियाँ गरीबों, किसानों और आदिवासियों के खिलाफ हैं, जिससे राज्य में सामाजिक और आर्थिक तनाव बढ़ रहा है।

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बिजली दरों में वृद्धि: जनता पर बोझ
छत्तीसगढ़, जो देश में बिजली उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है, में बिजली दरों में वृद्धि ने आम लोगों को हैरान कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम न केवल किसानों और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रहा है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि बिजली उत्पादक राज्य में दरें बढ़ाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? चंद्रकांत कोरे ने बताया, “हम पहले ही महँगाई से जूझ रहे हैं। बिजली बिल बढ़ने से अब खेती और घर चलाना और मुश्किल हो जाएगा।”

भारत माला परियोजना: मुआवज़े पर विवाद
भारत माला परियोजना के तहत ज़मीन अधिग्रहण के बाद किसानों को मिलने वाला मुआवज़ा भी विवाद का केंद्र बना हुआ है। आरोप है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय जिन किसानों को उनकी ज़मीन के लिए 32 लाख रुपये  का मुआवज़ा निर्धारित किया गया था, उन्हें अब मात्र 90,000 रुपये दिए गए। कई किसानों का कहना है कि यह राशि उनकी ज़मीन की रजिस्ट्री लागत भी नहीं निकाल पा रही। मुआवज़े की माँग को लेकर प्रदर्शन करने वाले किसानों पर पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के आरोप भी सामने आए हैं, जिसने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

आदिवासियों और गरीबों पर प्रभाव
आलोचकों का कहना है कि जंगल कटाई और बुलडोज़र कार्रवाइयों ने आदिवासियों और गरीबों को बेघर कर दिया है। इसके अलावा, अनाज, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ाई हैं। बुजुर्गों को दवाइयों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि युवा बेरोज़गारी की मार झेल रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र में स्कूलों के बंद होने और शिक्षकों की बेरोज़गारी ने भी असंतोष को बढ़ावा दिया है।
किसानों की अन्य समस्याएँ
किसानों का कहना है कि समय पर खाद की उपलब्धता न होने से खेती प्रभावित हो रही है। एक किसान, श्यामलाल चंद्राकर ने कहा, “खाद के लिए लाइन में लगना पड़ता है, और अब बिजली दरें बढ़ने से सिंचाई का खर्च भी बढ़ेगा। सरकार हमें जीने देगी या नहीं?”

सरकार का पक्ष
हालाँकि, भाजपा सरकार के प्रवक्ताओं का कहना है कि बिजली दरों में वृद्धि उत्पादन लागत और बुनियादी ढाँचे के रखरखाव के लिए आवश्यक थी। मुआवज़े के मुद्दे पर सरकार का दावा है कि वह किसानों के हित में काम कर रही है और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
आगे की राह
छत्तीसगढ़ की जनता अब जवाब माँग रही है। क्या सरकार इन मुद्दों पर स्पष्टता लाएगी और जनता के हित में कदम उठाएगी? या यह असंतोष और गहरा होगा? यह सवाल न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए प्रासंगिक है, जहाँ विकास और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती बना हुआ है।

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