एसईसीएल कुसमुंडा खदान में भू-विस्थापितों के धरने और लेडी बाउंसरों के टकराव का वीडियो वायरल

कोरबा, 15 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एसईसीएल कुसमुंडा खदान के जीएम कार्यालय के बाहर भू-विस्थापित महिलाओं और निजी कंपनी निलकंठ की लेडी बाउंसरों के बीच टकराव का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मुआवजा, नौकरी और बसाहट की मांगों को लेकर भू-विस्थापित परिवारों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था, जिस दौरान बाउंसरों के कथित अभद्र व्यवहार ने विवाद को और हवा दी।
धरने का कारण और प्रदर्शन
भू-विस्थापित परिवारों ने एसईसीएल कुसमुंडा के मुख्यमहाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर तीन दिवसीय आंदोलन की चेतावनी दी थी। प्रदर्शनकारी महिलाएं और पुरुष गेट के सामने खाट डालकर हड़िया-बर्तन के साथ बैठ गए और मुआवजा, नौकरी, बसाहट जैसी मांगों को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान एसईसीएल अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
लेडी बाउंसरों का विवादास्पद व्यवहार
धरने के दौरान निजी कंपनी निलकंठ की महिला बाउंसरों द्वारा कथित तौर पर अभद्र व्यवहार का वीडियो सामने आया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में बाउंसरों को प्रदर्शनकारी महिलाओं के साथ बदसलूकी करते देखा गया, जिसने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा किया। इस घटना ने भू-विस्थापितों की मांगों को और अधिक चर्चा में ला दिया।
आंदोलन समाप्त, लेकिन विवाद जारी
आंदोलनकारी परिवारों को अधिकारियों से आश्वासन मिलने के बाद धरना समाप्त हो गया। हालांकि, लेडी बाउंसरों के व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार शेयर हो रहा है, जिससे जनता की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग इसे भू-विस्थापितों के प्रति असंवेदनशील रवैये का प्रतीक मान रहे हैं।
भू-विस्थापितों की मांगें
प्रदर्शनकारी मुआवजा, स्थायी नौकरी और उचित बसाहट की मांग कर रहे थे। कुसमुंडा खदान के विस्तार से प्रभावित इन परिवारों का कहना है कि उनकी जमीनें अधिग्रहित होने के बाद भी उन्हें उचित मुआवजा और रोजगार नहीं मिला है। यह मुद्दा कोरबा में लंबे समय से विवाद का विषय रहा है।
एसईसीएल प्रशासन ने मामले पर अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन वायरल वीडियो के बाद जांच की मांग तेज हो रही है।



