“बालोद शिक्षा घोटाले का मास्टरमाइंड – डीएमसी अनुराग त्रिवेदी और जिला प्रशासन की मिलीभगत से एक और 2 करोड़ की लूट!”
“बालोद शिक्षा घोटाले का मास्टरमाइंड –तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी और जिला प्रशासन की मिलीभगत से एक और 2 करोड़ की लूट!”

*“बालोद शिक्षा घोटाले का मास्टरमाइंड – तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी और जिला प्रशासन की मिलीभगत से एक और 2 करोड़ की लूट””

बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में ख्याति प्राप्त खेल एवं समाज के लिए कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद का कहना है कि समग्र शिक्षा विभाग कार्यालय बालोद में “उपचारात्मक प्रशिक्षण” के नाम पर किया गया 2 करोड़ का घोटाला अब बड़ा खुलासा बनकर सामने आ रहा है। इस पूरे काले खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी, जिनकी शह और मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी लूट संभव ही नहीं थी।आरोप यह है कि जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने आँख मूँदकर इस भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया। “उपचारात्मक प्रशिक्षण” के नाम पर करोड़ों का बजट आया, लेकिन बच्चों को उसका कोई लाभ नहीं मिला। फर्जी उपस्थिति पत्रक, मनगढ़ंत रिपोर्ट और कागजी कार्रवाई से शासन को दिखा दिया गया कि योजनाएं सफलतापूर्वक चल रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण स्कूलों में बच्चों तक एक रूपया भी सही मायने में खर्च नहीं हुआ।

*घोटाला कैसे हुआ, जाने?*
विभाग ने पहले बच्चों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर शासन को भेजी।उसी आधार पर लाखों-करोड़ों का बजट स्वीकृत करवाया गया।प्रशिक्षण शिविरों की जगह सिर्फ कागजों पर आयोजन दिखाए गए।स्कूलों में बच्चों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई।ठेकेदारों को बिना काम कराए ही भुगतान जारी कर दिया गया।प्रशिक्षण सामग्री और उपकरणों की खरीद के नाम पर फर्जी बिल लगाए गए।अधिकारी, ठेकेदार और दलालों के बीच कमीशनखोरी का बंटवारा पहले से तय था।
*कानूनी पहलू*
*इस पूरे मामले में कई गंभीर धाराएं लागू होती हैं*
भारतीय दंड संहिता (IPC)
धारा 409: सरकारी पद का दुरुपयोग कर विश्वासघात (Criminal Breach of Trust by Public Servant)।
धारा 420: धोखाधड़ी कर सरकारी धन हड़पना।
धारा 467, 468, 471: फर्जी दस्तावेज़, जाली हस्ताक्षर और फर्जी उपस्थिति रजिस्टर बनाने का अपराध।
धारा 120B: आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy)।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
धारा 7: रिश्वत लेना और देना।
धारा 13(1)(d): पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ उठाना।

*गंभीर सवाल*
तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी पर आरोप है कि उन्होंने विभागीय अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से पूरा घोटाला प्लान किया और कमीशनखोरी की खुली लूट चलाई। यह महज भ्रष्टाचार नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ किया गया अपराध है।सूचना के अधिकार संघ के जिला अध्यक्ष यशवंत निषाद ने कहा कि “तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी और जिला प्रशासन की मिलीभगत से यह पूरी लूट हुई है, अगर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया जाएगा।”
*जनता का सवाल*
अब जनता पूछ रही है –
क्या मास्टरमाइंड तत्कालीन डीएमसी अनुराग त्रिवेदी और जिला प्रशासन पर IPC की धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज होगी और गिरफ्तारी होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों और लीपापोती की भेंट चढ़ जाएगा?अगर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो यह साफ संदेश जाएगा कि बालोद में शिक्षा विभाग अब बच्चों की पढ़ाई नहीं, बल्कि अफसरों और नेताओं की जेबें भरने का अड्डा बन चुका है।




