हमर छत्तीसगढ़

सत्ता के नशे में जनहित का गला घोंटा जा रहा है — बालोद के सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने भाजपा डौंडीलोहारा पर लगाए गंभीर आरोप

बालोद :—छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने भाजपा डौंडीलोहारा मंडल पर ऐसे गंभीर, चुभते और असहज करने वाले आरोप लगाए हैं, जिन्हें सुनकर किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ हिल जाए। निषाद का कहना है कि “सत्ता की चकाचौंध में बैठे कुछ नेता” जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय व्यक्तिगत बदले की राजनीति और प्रशासन पर दबाव बनाने में लगे हुए हैं।मोहन निषाद ने भाजपा की कथित तीन ‘खास उपलब्धियों’ को बेनकाब करते हुए कहा कि ये उपलब्धियां नहीं, बल्कि जनहित के खिलाफ योजनाबद्ध चोटें हैं —

1. कांग्रेस नेता को व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स से हटाने की साजिश — सत्ता का बेशर्म दुरुपयोग

निषाद ने आरोप लगाया कि पुराने जनपद में एक कांग्रेस नेता की दुकान हटवाने के लिए भाजपा के कुछ नेता अधिकारियों पर दिन-रात दबाव डालते रहे, लगातार फोन कर-करके प्रशासन को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।उन्होंने कहा, “ये कार्रवाई नहीं, सत्ता का खुला दंभ है — विपक्ष को निशाना बनाना, उपद्रव फैलाना और राजनीतिक प्रतिशोध के लिए सरकारी मशीनरी को हथियार बनाना।”

2. स्वास्थ्य विभाग के मामले में निजी रंजिश का खेल — पप्पू शर्मा से निकाला दुश्मनी

मोहन निषाद ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में चिरायु व अन्य मसलों को आधार बनाकर पप्पू शर्मा को निशाना बनाया जो व्यक्तिगत रंजिश की बदतर मिसाल है।उनके अनुसार, यह कार्रवाई न तो कानूनन मजबूरी थी, न जनहित की जरूरत — यह सिर्फ एक पक्ष को नीचा दिखाने और निजी दुश्मनी का बदला लेने का हथकंडा था।

3. डॉ. मनोज को “धर्मांतरण” विवाद में फंसाकर क्लिनिक बंद कराने का प्रयास — किसी की रोज़ी-रोटी पर बेरहमी से लात

मोहन निषाद ने कहा कि डौंडीलोहारा क्षेत्र के नामी डॉक्टर की प्रतिष्ठा, आजीविका और वर्षों की कमाई हुई विश्वसनीयता को सिर्फ इसलिए कुचला गया क्योंकि कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ चाहिए था।उन्होंने इसे “क्लिनिक को राजनीतिक शिकार बनाना, और किसी की मेहनत को पैरों तले रौंद देना” बताया।निषाद ने यह भी तीखा हमला बोला कि डौंडीलोहारा नगर भाजपा मंडल की यह तीनों ‘उपलब्धियां’ तब सामने आई हैं जब जिले की सभी तीन विधानसभा सीटों पर भाजपा बुरी तरह हार चुकी है।उन्होंने कहा, “जनता ने वोट से सबक दिया था, लेकिन सत्ता के नशे में चूर कुछ नेता आज भी बदले की राजनीति छोड़ने तैयार नहीं। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।”मोहन निषाद ने मांग की है कि इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच हो और प्रशासन को सत्ता के दबाव से मुक्त कर निष्पक्ष कार्य करने दिया जाए।

Related Articles

Back to top button