BEO हिमांशु मिश्रा की विकृत सोच बच्चों को भूखा रखकर पैसे के लिए सरकारी रिकॉर्ड में खाना “चढ़ाने” का काला खेल

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने कहा कि डौंडीलोहारा ब्लॉक मुख्यालय के टिकरापारा स्कूल में मध्यान भोजन न बनने की घटना केवल लापरवाही नहीं—यह बच्चों की भूख पर किया गया प्रशासनिक अत्याचार है। जिस मध्यान भोजन को केंद्र शासन बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य सुविधा मानता है, उसी को यहाँ एक भ्रष्ट खेल और घिनौने रिकॉर्ड मैनेजमेंट और BEO हिमांशु मिश्रा की निर्लज्ज मानसिकता के हवाले कर दिया गया है। भोजन बच्चों को नहीं, बल्कि सरकारी कागजों को परोसा जा रहा है—रसोईघर में चूल्हा नहीं जला, पर “रिकॉर्ड में खाना चढ़ा दिया गया”! यह हेराफेरी अब सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों की सार्वजनिक लूट है टिकरापारा स्कूल में भोजन न बनना, कभी कीड़ेयुक्त भोजन परोसना, और अब तो हद यह कि सरकारी रजिस्टर में भोजन वितरण दिखाकर पैसे निकालने की खुलेआम व्यवस्था—ये सब साबित करते हैं कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की नीयत पूरी तरह बेईमान हो चुकी है। यह एक “सिस्टमेटिक लूट” है, जिसे बिना प्रशासनिक संरक्षण के चलाना असंभव है। ऐसा कृत्य छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं बल्कि उनकी भूख को आय का साधन बनाने की नीचतम सीमा है।जिला शिक्षा तंत्र की जिम्मेदारी बच्चों को सुरक्षित, पोषक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना है। लेकिन यहां व्यवस्था उलट गई है—बच्चे भूखे, रिकॉर्ड भरा हुआ; थाली खाली, रजिस्टर मोटा। यह शर्मनाक ढांचा दिखाता है कि विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मध्यान भोजन योजना को
भी नहीं छोड़ रहे हैं शिक्षक संहिता सेवा नियम वित्तीय प्रक्रिया—सब को रौंदते हुए BEO हिमांशु मिश्रा ने इस योजना को “राजस्व-स्रोत” की तरह उपयोग किया है।शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार भोजन न बनना गंभीर अनियमितता भोजन वितरण झूठा चढ़ाना वित्तीय अपराध बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डालना विभागीय अपराध और लगातार शिकायतों के बाद भी अनदेखा करना सेवा नियमों का घोर उल्लंघन है।इन सबके बावजूद इस अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना, जिले में प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है। यह सवाल उठता है—क्या बच्चों की भूख पर राजनीति और भ्रष्टाचार का पहरा बैठ गया है? क्या शासन को मध्यान भोजन के नाम पर चल रही इस लूट से आंखें मूंदकर बैठना है?अब यह प्रकरण जिला स्तर से ऊपर उठ चुका है। यह मुद्दा सीधे मुख्यमंत्री के संज्ञान में जाना चाहिए, क्योंकि यह केवल लापरवाही नहीं—यह सरकारी धन और बच्चों के अधिकार दोनों की दोहरी लूट है। यदि सरकार इस काले खेल को अनदेखा करती है, तो यह संकेत होगा कि बच्चों की थाली का मूल्य जिलों में “फर्जी वितरण” की रकम से कम आंका जा रहा है।
मुख्यमंत्री से मांग
BEO हिमांशु मिश्रा को तत्काल निलंबित किया जाए।मध्यान भोजन फर्जी वितरण और रिकॉर्ड में खाना चढ़ाने की वित्तीय जांच EOW या सतर्कता विभाग से करवाई जाए टिकरापारा सहित पूरे ब्लॉक में भोजन वितरण की स्वतंत्र टीम द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाए।दोषी शिक्षाक रसोइयों और प्रभारी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए टिकरापारा स्कूल की घटना बच्चों की थाली पर सीधे हमला है। यह सिर्फ खबर नहीं—यह शासन के सामने रखा गया तीखा सबूत है कि बच्चे भूखे रह रहे हैं और रिकॉर्ड पेटभर खा रहा है। अब यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती, तो यह कलंक विभाग नहीं, पूरे राज्य के माथे पर दर्ज हो जाएगा।



