हमर छत्तीसगढ़

हल्बा-हल्बी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से किया मुलाकात अमर नायक गैंदसिंह जी के शहादत दिवस समारोह में सहभागिता का दिया आमंत्रण

 

रिपोर्टर:- दिनेश कुमार नेताम

बालोद :— छत्तीसगढ़ के आदिवासी अस्मिता, इतिहास और बलिदान की गौरवशाली परंपरा को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत अखिल भारतीय राष्ट्रीय महासभा हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को परलकोट क्रांति के महान नेतृत्वकर्ता, क्रांतिकारी अमर शहीद गैंदसिंह जी के 201वें शहादत दिवस समारोह में शामिल होने हेतु औपचारिक रूप से आमंत्रित किया।प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यह ऐतिहासिक कार्यक्रम दिनांक 20 जनवरी 2026 को ग्राम नर्राटोला, जिला बालोद में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। यह समारोह केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की स्वाभिमान चेतना, संघर्षशील इतिहास और नई पीढ़ी को अपने नायकों से जोड़ने का एक सशक्त मंच होगा। अमर शहीद गैंदसिंह जी ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ परलकोट क्रांति का नेतृत्व करते हुए आदिवासी समाज को अन्याय, शोषण और दमन के विरुद्ध संगठित किया, जिसकी गूंज आज भी छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में सुनाई देती है।
मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अमर शहीद गैंदसिंह जी का बलिदान केवल हल्बा-हल्बी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और युवाओं में देशभक्ति, सामाजिक एकता तथा न्याय के मूल्यों को मजबूत करते हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की सफलता के लिए अग्रिम शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज की संस्कृति, इतिहास और नायकों के सम्मान के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।इस अवसर पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय महासभा हल्बा-हल्बी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष  मंतुराम पवार, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष  जी. आर. राणा, राष्ट्रीय महासचिव  श्याम सिंह तारम,  जी. आर. चुरेंद्र,  देवेंद्र सिंह भाऊ, पी. आर. नाइक, देवलाल ठाकुर सहित समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा मुकेश पौसार्य, छत्तर सिंह कोमा, उदय राम सिवाना, तिहार सिंह तारम, खोरबहरा गौर, दीपेश कृपाल, सुहेर कोसमा, बनवाली चिराम, हिन्सा राम चिराम, गौतम देहारी, नितेश नायक सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 201वां शहादत दिवस समारोह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना को केंद्र में रखकर आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर से समाजजन, बुद्धिजीवी, युवा और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देगा कि अपने नायकों को याद रखना ही समाज को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाता है।
यह सौजन्य भेंट आदिवासी समाज और शासन के बीच संवाद, सम्मान और सहभागिता का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरी, जो छत्तीसगढ़ की समावेशी और जनसंवेदनशील परंपरा को और मजबूत करती है।

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