हमर छत्तीसगढ़

कबाड़ी की दुकान नहीं, अपराध का अड्डा पलारी में चोरी का संगठित नेटवर्क, प्रशासन की निष्क्रियता पर करारा प्रहार

 

रिपोर्टर :- रिखी साहू

बालोद/पलारी:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के नगर पंचायत पलारी में कानून और व्यवस्था को खुली चुनौती देता हुआ एक खतरनाक आपराधिक तंत्र बेखौफ सक्रिय है। धमतरी पहुँच मुख्य मार्ग में एक निजी शैक्षणिक संस्थान डॉ. अब्दुल कलाम पब्लिक स्कुल के पीछ संचालित कथित कबाड़ी दुकान वास्तव में चोरी के सामानों की अवैध मंडी बन चुकी है। बाहर से यह दुकान कबाड़ी खरीदने-बेचने का नाटक करती है, जबकि भीतर अपराध का वह काला कारोबार चल रहा है, जिसने पूरे इलाके की नींद उड़ा दी है।स्थानीय नागरिकों और पीड़ित किसानों का आरोप है कि यह दुकान चोरी को बढ़ावा देने का केंद्र बन चुकी है। खेतों में लगे लोहे के पोल, तार, बोर पाइप, केबल वायर, ट्रैक्टर के कीमती पार्ट्स, बैटरियाँ, साइकिल और मोटरसाइकिलें—सब कुछ यहां औने-पौने दामों में खरीदा जा रहा है। चोरों को भरोसा है कि चोरी किया गया माल यहीं खप जाएगा, इसी वजह से चोरी की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। यह केवल सामान की खरीद नहीं, बल्कि अपराध को खुला संरक्षण देने की साजिश है।दुकान संचालक की कार्यप्रणाली और भी अधिक संदिग्ध है। जब भी कोई सवाल पूछता है या जानकारी लेना चाहता है, तब सामने महिलाओं को कर दिया जाता है और बताया जाता है कि संचालक “ज़रूरी काम” से बाहर है। यह तरीका साफ दर्शाता है कि सब कुछ सुनियोजित है—सवालों से बचने की चाल, जांच से बचने का हथकंडा और कानून को भ्रमित करने की कोशिश।इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा शिकार किसान और आम नागरिक बन रहे हैं। रातों-रात खेतों से फसल सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के पाइप और तार गायब हो रहे हैं। ट्रैक्टर के पार्ट्स और बैटरियाँ चोरी हो रही हैं, जिससे खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ रहा है। यह आर्थिक नुकसान ही नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज की सुरक्षा भावना पर सीधा हमला है। चोर-उचक्कों का हौसला इसलिए बुलंद है क्योंकि उन्हें पता है कि चोरी का माल खरीदने वाला सुरक्षित ठिकाना मौजूद है।अब सवाल यह नहीं है कि अपराध हो रहा है या नहीं, सवाल यह है कि प्रशासन क्या कर रहा है? क्या स्थानीय पुलिस और नगर प्रशासन को इस गतिविधि की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? यदि सब कुछ देखकर भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध के प्रति मौन समर्थन माना जाएगा। कानून का डर खत्म होना प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।यह कबाड़ी दुकान केवल अवैध व्यापार नहीं चला रही, बल्कि पूरे क्षेत्र को अपराध की प्रयोगशाला में बदल रही है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह नेटवर्क और मजबूत होगा, चोरी की घटनाएं और बढ़ेंगी और आम जनता का भरोसा कानून से पूरी तरह टूट जाएगा।प्रशासन को अब दिखावे की कार्रवाई नहीं, बल्कि निर्णायक प्रहार करना होगा। कबाड़ी दुकानों की सघन जांच, खरीदे गए हर सामान का दस्तावेजी सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी, संदिग्ध लेन-देन पर तत्काल छापेमारी और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है। आधे-अधूरे कदम अब स्वीकार्य नहीं हैं।जनता स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दे रही है—यदि कबाड़ी की आड़ में चल रहे इस अपराध के अड्डे पर शीघ्र ताला नहीं लगा, तो प्रशासन की चुप्पी इतिहास में अपराध के साथ खड़े होने के रूप में दर्ज की जाएगी। अब फैसला प्रशासन को करना है—कानून के साथ या अपराध के साथ।

स्थानीय निवासी कहना

स्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी उत्तम साहू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह कबाड़ी दुकान नहीं, खुला अपराध केंद्र बन चुकी है। यहां चोरी का माल बेधड़क खरीदा जाता है और सबको इसकी जानकारी है। रात होते ही संदिग्ध लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन को जैसे कुछ दिखाई ही नहीं देता। किसानों की मेहनत पर डाका डाला जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। अगर यही हाल रहा तो चोरी करने वालों को खुली छूट मिल जाएगी और ईमानदार लोग ही डर के साए में जीने को मजबूर होंगे। यह सीधी-सीधी प्रशासनिक नाकामी और अपराधियों को संरक्षण देने जैसा है।”

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