हमर छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय राजमार्ग पर अव्यवस्था, जिम्मेदार तंत्र बेखबर कुसुमकसा में ट्रैफिक बना रोज़ का संकट

 

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में पुरूर से होते हुए महाराष्ट्र जाने वाली नेशनल हाईवे सड़क पर कुसुमकसा के पास का दृश्य किसी चेतावनी से कम नहीं है। इस मार्ग पर सड़क के दोनों ओर भारी वाहनों की बेतरतीब कतारें यह साबित करने के लिए काफी हैं कि यातायात और परिवहन विभाग अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुंह मोड़ चुका है। नियमों को ठेंगा दिखाकर खड़े ट्रक, हाइवा और मालवाहक वाहन न सिर्फ आवागमन को बाधित कर रहे हैं, बल्कि हर गुजरते पल के साथ किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहे हैं।नेशनल हाईवे किसी गांव की गलियों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क के दोनों किनारों पर खड़े वाहन रास्ते को संकरा बना चुके हैं। सामने से आने वाला वाहन दिखे या न दिखे, यह अब किस्मत का खेल बन गया है। दोपहिया चालकों, पैदल यात्रियों और स्कूली बच्चों के लिए यह मार्ग जानलेवा साबित हो रहा है। बावजूद इसके, न तो यातायात पुलिस की कोई सक्रियता दिखती है और न ही परिवहन विभाग की कोई सख्ती नजर आती है।यह सवाल अब अनदेखा नहीं किया जा सकता कि आखिर इतनी खुली अव्यवस्था किसके संरक्षण में फल-फूल रही है? क्या यह सब अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव है? नियम स्पष्ट हैं—नेशनल हाईवे पर इस तरह सड़क घेरकर वाहन खड़ा करना अपराध है। फिर भी कुसुमकसा के पास हालात इतने बदतर क्यों हैं? क्या कानून केवल कागजों तक सीमित रह गया है?ट्रकों की यह अवैध पार्किंग न केवल जाम का कारण बन रही है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं के लिए भी भारी संकट खड़ा कर रही है। एंबुलेंस, दमकल या पुलिस वाहन यदि इस रास्ते से गुजरना चाहें, तो उन्हें भी इन्हीं अवरोधों से जूझना पड़ता है। यह सीधी-सीधी जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, और इसकी पूरी जिम्मेदारी उन विभागों पर आती है जिनका काम व्यवस्था बनाए रखना है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या से परेशान हैं, लेकिन शिकायतों का नतीजा शून्य रहा है। कभी-कभार दिखावटी कार्रवाई कर फोटो खिंचवा ली जाती है, फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है। न चालान का डर, न वाहन जब्ती की चिंता—क्योंकि सबको पता है कि कार्रवाई कुछ घंटों से ज्यादा नहीं टिकेगी।यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक नाकामी का जीवंत उदाहरण है। यातायात विभाग की निष्क्रियता और परिवहन विभाग की चुप्पी ने कुसुमकसा को अराजकता का केंद्र बना दिया है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो किसी दिन यही सड़क किसी बड़ी त्रासदी की गवाह बनेगी।खोखले आश्वासनों की नहीं, बल्कि कठोर कार्रवाई की अब जरूरत है।अवैध रूप से खड़े वाहनों को तत्काल हटाया जाए, स्थायी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। वरना यह साफ मान लिया जाए कि कानून नहीं, बल्कि अव्यवस्था ही इस नेशनल हाईवे पर राज कर रही है।

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