गौसेवा से आत्मनिर्भरता की ओर बधमरा की महिलाओं का प्रेरक अभियान

रिपोर्टर:- मीनू साहू(मेड़की)
बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिला मुख्यालय से मात्र तीन किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत बधमरा आज ग्रामीण स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है। यहाँ जय कपिलेश्वर स्वः सहायता समूह तथा उन्नति स्वः सहायता समूह की महिलाएँ परंपरा और आजीविका को जोड़ते हुए गोबर से कंडे (उपले) तैयार कर रही हैं। यह पहल केवल उत्पाद निर्माण नहीं, बल्कि संस्कृति, अर्थव्यवस्था और प्रकृति के संतुलन की दिशा में एक जागृत कदम है।
समूह की अध्यक्ष प्रोफेसर तिजानबाई देवांगन ने ग्रामवासियों और प्रदेश के नागरिकों से भावपूर्ण अपील की है कि खुले में घूम रहे मवेशियों को गौठानों तक लाने में सहयोग करें। उनका कहना है कि यदि गाय सुरक्षित रहेंगी तो उनसे प्राप्त गोबर से पूजा-पाठ, हवन, धार्मिक अनुष्ठान और पर्यावरण हितैषी ईंधन तैयार किया जा सकेगा। यह प्रयास न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि स्वच्छता, जैविक सोच और ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा देता है।
इस कार्य में सचिव आरती देवांगन सहित सदस्य मीना साहू, पद्मा देवांगन, कीर्ति विश्वकर्मा, पूजा देवांगन, अनुसुइया तथा कलेश्वरी निषाद पूरी लगन से जुटी हैं। महिलाएँ सामूहिक श्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ गोबर संग्रह से लेकर कंडे निर्माण, सुखाने और वितरण तक का कार्य संगठित रूप से कर रही हैं। उनके हाथों की मेहनत केवल उत्पाद नहीं बना रही, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई कहानी गढ़ रही है।
यह पहल कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है।
पहला — धार्मिक उपयोग के लिए शुद्ध और प्राकृतिक सामग्री उपलब्ध हो रही है।दूसरा — पर्यावरण के अनुकूल ईंधन से प्रदूषण कम करने में मदद मिल रही है।तीसरा — ग्रामीण महिलाओं को आय का स्रोत मिल रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।चौथा — गौठान व्यवस्था को मजबूती मिल रही है, जिससे पशु संरक्षण और स्वच्छता दोनों को लाभ मिल रहा है।बधमरा की यह पहल दिखाती है कि जब महिलाएँ संगठित होती हैं तो वे केवल घर नहीं, समाज की दिशा भी बदल देती हैं। गोबर के कंडों से उठती यह मिट्टी की सुगंध आत्मनिर्भर भारत के ग्रामीण स्वरूप की पहचान बन सकती है।
आज आवश्यकता है कि हर नागरिक इस प्रयास को समझे, गौसंरक्षण में भागीदारी निभाए और स्थानीय उत्पादों को अपनाकर इन मेहनतकश बहनों का मनोबल बढ़ाए।
बधमरा की यह मशाल केवल गाँव की नहीं, पूरे समाज की चेतना जगाने वाली रोशनी है।



