रंग, राग और संस्कार का महाकुंभ आंमदी में उमड़ा आस्था और ऊर्जा का जनसैलाब

रिपोर्टर :- उत्तम साहु
धमतरी:- छत्तीसगढ़ में धमतरी के नगर पंचायत आंमदी की पावन धरती पर जब संस्कृति की स्वर-लहरियां गूंजती हैं, तो केवल आयोजन नहीं होता—एक चेतना जागती है, एक विचार आकार लेता है। श्री राधाकृष्ण युवा शक्ति मंच द्वारा आयोजित दो दिवसीय भव्य फाग, गायन, वादन एवं झांकी प्रतियोगिता ने इसी चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। श्री राधाकृष्ण मंदिर, स्कूल चौक आंमदी में 02 एवं 03 मार्च 2026 को सजे इस आयोजन ने परंपरा और प्रगति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।मंच पर सजी राधा-कृष्ण की मनमोहक छवि केवल सजावट नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह आयोजन बताता है कि त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम है। जब ढोल-मंजीरे की थाप पर फाग की धुन गूंजती है, तब हर दिल में अपनत्व की सरिता बहने लगती है। प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला, वहीं बुजुर्गों के अनुभव ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।इस महोत्सव का मूल उद्देश्य स्पष्ट है—संस्कारों की नींव को मजबूत करना, सामाजिक समरसता को विस्तार देना और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना। आज जब आधुनिकता की दौड़ में पहचान धुंधली पड़ने लगती है, तब ऐसे आयोजन हमारी अस्मिता को सशक्त बनाते हैं। यहां केवल प्रस्तुति नहीं, प्रतिबद्धता दिखी; केवल उत्साह नहीं, उत्तरदायित्व झलका।आंमदी के नागरिकों की सहभागिता ने सिद्ध कर दिया कि एकजुट समाज ही विकास की असली ताकत होता है। मंच संचालन से लेकर व्यवस्थाओं तक हर कार्य में अनुशासन और समन्वय की मिसाल देखने को मिली। यह कार्यक्रम बताता है कि यदि इरादे नेक हों तो संसाधन स्वतः मार्ग बना लेते हैं।श्री राधाकृष्ण युवा शक्ति मंच का यह प्रयास केवल दो दिनों का उत्सव नहीं, बल्कि वर्षभर समाज सेवा और सांस्कृतिक जागरण की प्रेरणा है। रंगों के इस पर्व ने संदेश दिया है कि मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं; विविधता हो सकती है, विभाजन नहीं।आइए, हम सब संकल्प लें कि इस ऊर्जा को केवल स्मृति तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने व्यवहार में उतारें। संस्कृति का दीप तभी प्रज्वलित रहेगा जब हर नागरिक अपने कर्तव्य को समझे और समाजहित को प्राथमिकता दे।आंमदी की इस ऐतिहासिक पहल ने साबित कर दिया है कि जब युवा शक्ति आगे बढ़ती है तो परिवर्तन निश्चित होता है। रंगों की इस गूंज ने यह संदेश दे दिया—हम संगठित हैं, सजग हैं और अपनी परंपरा पर गर्वित हैं। यही है इस आयोजन की असली जीत, यही है इसका प्रखर उद्देश्य।



