सुषमा के स्नेहिल सृजन”वसंत की मधुर अनुभूति

रिपोर्टर :- मीनू साहु
रायपुर:- छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल, रायपुर की यह रचना वसंत की इसी मोहक अनुभूति को अत्यंत सजीव और मनोहारी शब्दों में अभिव्यक्त करती है।प्रकृति के आंचल में जब नवजीवन की हल्की-हल्की आहट सुनाई देती है, जब वृक्षों की सूनी डालियों पर कोमल कोंपलें मुस्कुराने लगती हैं और वातावरण में मादक सुगंध घुल जाती है, तब समझ लेना चाहिए कि वसंत का आगमन हो चुका है। यही वह ऋतु है जो धरती को नवसौंदर्य से सजा देती है और हर दिशा में उल्लास की छटा बिखेर देती है। वसंत के आते ही पेड़ों की डालियों पर कोंपलों का कोमल श्रृंगार दिखाई देने लगता है। कलियाँ अपनी मादकता में मुस्कुराती हुई प्रतीत होती हैं और वृक्षों की शाखाएँ मानो आनंद से झूम उठती हैं। प्रकृति का यह परिवर्तन केवल दृश्य नहीं, बल्कि एक भाव है जो मन को भी नई ऊर्जा से भर देता है। हर पत्ता, हर फूल और हर लता जैसे जीवन के नवगीत गुनगुनाने लगती है।बागों में आम के पेड़ों पर लटकी अमियाँ वसंत के आगमन का मधुर संकेत देती हैं। अमराइयों की छाया में झूलते कच्चे फल प्रकृति के उस सृजन चक्र का प्रतीक हैं जो हर वर्ष नए उत्साह के साथ आरंभ होता है। हवा के झोंकों के साथ डोलते ये फल और पत्ते मानो किसी मधुर राग की लय पर थिरकते प्रतीत होते हैं। इस समय वातावरण में ऐसी ताजगी होती है जो हर मन को प्रसन्न कर देती है।धरती भी इस ऋतु में अपना विशेष श्रृंगार धारण कर लेती है। कहीं पीले सरसों के फूलों की चादर बिछी होती है, तो कहीं हरीतिमा से सजी खेतों की आभा मन को मोह लेती है। ऐसा लगता है जैसे वसुधा ने स्वयं को रंग-बिरंगे कालीनों से अलंकृत कर लिया हो। यह दृश्य केवल आंखों को ही नहीं, बल्कि आत्मा को भी आनंदित कर देता है।झरनों की कल-कल ध्वनि और बहते जल की मधुर सरगम वसंत की शोभा को और भी बढ़ा देती है। जल की यह निरंतर धारा जीवन की गति और प्रकृति की निरंतरता का संदेश देती है। इन सबके बीच कवयित्री सुषमा की संवेदनशील दृष्टि प्रकृति के हर छोटे-बड़े परिवर्तन को स्नेहिल भाव से देखती है और उसे शब्दों के माध्यम से सुंदर अभिव्यक्ति प्रदान करती है।वास्तव में वसंत केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि नवजीवन, उल्लास और सृजन का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि हर पतझड़ के बाद एक नया वसंत अवश्य आता है। प्रकृति का यही संदेश मनुष्य को आशा, उत्साह और सकारात्मकता से भर देता है।
कवयित्री – सुषमा प्रेम पटेल रायपुर, छत्तीसगढ़



