हमर छत्तीसगढ़

कारका भाट में शक्कर कारखाने के नाम पर सहकारिता की सबसे बड़ी ठगी? 26 साल से जनता के पैसे का हिसाब गायब!

 

संपादक :- मीनू साहू 

बालोद:- छत्तीसगढ़ में बालोद जिले के करकाभाट में मां दंतेश्वरी शक्कर कारखाना खोलने का सपना दिखाकर क्षेत्र की भोली-भाली जनता से सहकारिता और विकास के नाम पर दो-दो हजार रुपये की राशि शेयर के रूप में वसूली गई थी। उस समय लोगों को भरोसा दिलाया गया कि यह कारखाना क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल देगा, किसानों को रोजगार मिलेगा, गन्ना उत्पादन बढ़ेगा और स्थानीय परिवारों की तकदीर चमकेगी। लेकिन आज 26 साल बीत जाने के बाद भी न कारखाने का सपना पूरा हुआ, न शेयरधारकों को उनका पैसा वापस मिला, और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने जनता के सामने जवाब देना जरूरी समझा।

यह मामला अब केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि सहकारिता कानून की आत्मा पर सीधा प्रहार नजर आता है। सहकारिता अधिनियम स्पष्ट रूप से कहता है कि जनता से शेयर राशि लेने वाली संस्था को पारदर्शी लेखा-जोखा रखना अनिवार्य है। प्रत्येक सदस्य को उसकी जमा पूंजी, लाभांश, संस्था की गतिविधियों और वित्तीय स्थिति की जानकारी देना कानूनी जिम्मेदारी होती है। लेकिन यहां तो वर्षों से ऐसा सन्नाटा पसरा है मानो हजारों लोगों की मेहनत की कमाई किसी अंधे कुएं में फेंक दी गई हो।

डौंडीलोहारा निवासी पदम संचेती जैसे अनेक लोग आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर वह राशि गई कहां? किस खाते में जमा हुई? किस अधिकारी ने इसकी निगरानी की? यदि संस्था बंद हो गई तो शेयरधारकों को सूचित क्यों नहीं किया गया? क्या सहकारिता विभाग केवल कागजों में कानून चलाने के लिए बैठा है? क्या गरीब किसानों और ग्रामीणों की गाढ़ी कमाई की कोई कीमत नहीं?

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतने वर्षों में किसी स्तर पर ठोस जांच, जवाबदेही या सार्वजनिक ऑडिट सामने नहीं आया। यह चुप्पी खुद संदेह को जन्म देती है। जनता से पैसा लेना आसान है, लेकिन उसका हिसाब देना क्यों मुश्किल हो जाता है? अगर यही हाल रहा तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति सहकारिता योजनाओं पर विश्वास नहीं करेगा।

अब समय आ गया है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों और समिति संचालकों की भूमिका सार्वजनिक की जाए, तथा हर शेयरधारक को उसकी राशि और ब्याज सहित भुगतान किया जाए। अन्यथा यह मामला सहकारिता व्यवस्था के नाम पर जनता के भरोसे की खुली लूट कहलाएगा।

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