बिना सूचना रातों-रात खेत पर बुलडोजर चलाने का आरोप, सम्मानित शिक्षक ने पटवारी और राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान उन्हें और उनकी पत्नी, अंग्रेजी विषय की शिक्षिका पुष्पा गंगबोईर साहू, को भी कथित रूप से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा

संपादक:- मीनू साहू
बालोद:- जिले के ग्राम सांकरा में कृषि भूमि से जुड़ा पारिवारिक विवाद अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शिक्षक तथा शासकीय हाई स्कूल जमरूआ में गणित व्याख्याता रघुनंदन गंगबोईर साहू ने आरोप लगाया है कि उनकी सौतेली मां और सौतेली बहनों ने कथित रूप से राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों एवं हल्का पटवारी की मिलीभगत से उन्हें बिना सूचना दिए विवादित कृषि भूमि की माप-जोख कराकर रातों-रात बुलडोजर चलवा दिया, जिससे खेत का स्वरूप बदल गया।
रघुनंदन ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय सोनूराम साहू सामाजिक, साहित्यिक और श्रमिक हितों से जुड़े सम्मानित व्यक्तित्व थे। प्रथम पत्नी स्वर्गीय बुद्धा बाई साहू के निधन के बाद परिवार के बुजुर्गों की सहमति से उन्होंने दूसरा विवाह किया था। बाद में खरीदी गई लगभग 5.50 एकड़ कृषि भूमि, जो ग्राम सांकरा में स्थित है, उस समय रघुनंदन के नाबालिग होने के कारण उनके तथा उनकी सौतेली मां के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज की गई।
उनका कहना है कि पिता के निधन के बाद संपत्ति को लेकर मतभेद बढ़ने लगे। विवाद के समाधान के लिए उन्होंने तहसीलदार कार्यालय में विधिवत बंटवारे का आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन प्रक्रिया के दौरान उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई। उनका आरोप है कि कई महत्वपूर्ण कार्रवाई उनकी अनुपस्थिति में पूरी कर ली गई और आदेश की प्रति प्राप्त करने के लिए भी महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े।
रघुनंदन ने यह भी दावा किया कि शिक्षा विभाग में चल रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान उन्हें और उनकी पत्नी, अंग्रेजी विषय की शिक्षिका पुष्पा गंगबोईर साहू, को भी कथित रूप से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, विभागीय निर्णयों के कारण दोनों लंबे समय से कार्य एवं वेतन संबंधी कठिनाइयों से गुजर रहे हैं, जबकि इस संबंध में न्यायालयीन आदेश भी मौजूद हैं।
शिक्षक का आरोप है कि इसी परिस्थिति का लाभ उठाकर राजस्व विभाग में एकतरफा कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। उन्हें बाद में जानकारी मिली कि संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में खेत की पैमाइश कर बुलडोजर से भूमि का भौतिक स्वरूप बदल दिया गया। उनका कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और प्रशासनिक पारदर्शिता के विपरीत प्रतीत होती है।
रघुनंदन ने जिला प्रशासन और राज्य शासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, संबंधित अधिकारियों एवं पटवारी की भूमिका की समीक्षा, विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने तथा यदि अनियमितता सिद्ध हो तो दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।



